Mandsaur mandi Bhav ( मंदसौर मंडी भाव )। मंदसौर मंडी भाव लिस्ट टुडे

आज के मंदसौर मंडी भाव Mandsaur Mandi Bhav

mandsaur mandi bhav

मंदसौर टुडे मैं आप सभी का स्वागत है इस पोस्ट में मंदसौर मंडी (Mandsaur Mandi bhav) में चल रहे फसलों के भाव के बारे में आपको जानकारी देंगे साथ ही मंडी की गतिविधियों के बारे में भी आपको सूचनाएं प्रदान करेंगे जिससे आपको मंदसौर के मंडी भाव mandsaur Mandi bhav तथा मंडी में फसलों की आवक में कमी तथा बढ़ोतरी के बारे में सही जानकारी मिलेगी इस पोस्ट में आपको मक्का, सोयाबीन, चना, गेहूं, लहसुन, प्याज, चना, मटर, जैसी सभी फसलों के न्यूनतम व अधिकतम भाव जो वर्तमान समय में मंदसौर मंडी में चल रहे हैं उनके बारे में पता चलेगा तो आइए जानते हैं मंदसौर मंडी के भाव

आज के मंदसौर मंडी भाव  Mandsaur Mandi Bhav

Updated दिनांक : 25 अगस्त 2021– www.mandsaurtoday.com

फसल

न्यूनतम भाव

अधिकतम भाव

मॉडल भाव 

मक्का 1720 1824

उड़द 4701 5299
सोयाबीन 8400 9530
गेहू 1800 2130
चना 4601 5216
मसूर 5959 7211
धनिया 6501 7421
लहसुन 2800 11250
मैथी 5600 9001
पोस्ता    
अलसी 7200 7450
सरसों 7000 7450
तारामीरा 6200 6203
इसबगोल 10000 12400
प्याज 400 1501
कलोंजी 15500 23701
तुलसी बीज 17901 19901 -
डॉलर चना 4900 9401
तिल्ली 4700 9241
तुवर      
मटर 4001 6503
असलीया 6000 6600
अजवाईन      
मूंग 4500 5000
ग्वार    


    * मक्का की खेती कैसे होती है

    मक्का की फसल रवि की फसल मानी जाती है किंतु इसे पूरे साल इसकी बुवाई कर सकते हैं आलू तथा गन्ने की फसल प्राप्त करने के बाद इस फसल को लगा सकते हैं मक्का की फसल कम पानी पर भी अच्छा उत्पादन देती है कई किसान भाई जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है वहां मक्का की अधिक बुराई करते हैं हालांकि रवि के मौसम में इसकी उत्पादकता ज्यादा मिलती है इसकी बीच की लागत भी कम ही है उसके साथ ही इससे पशुओं का चारा भी प्राप्त होता है जरूरत पड़ने पर बुड्ढे भी प्राप्त किए जा सकते हो और कई कंपनियों में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है

     

    मक्का के भाव क्या है मक्का के भाव क्या है[/caption]
     
    मक्के की फसल के बुवाई का समय -
    खरीफ में जून से जुलाई तक की जाती है
    रवि में अक्टूबर से नवंबर तक की जाती है
    जायद में जनवरी से मार्च तक की जाती है
     
    बुवाई के समय मक्का में जलवायु के साथ 28 डिग्री तापमान होना अच्छा होता है और मिट्टी की अगर बात करें तो दोमट व बलवी दोमट मिट्टी अधिक पैदावार के लिए उपयोगी मानी जाती है और साथ ही अधिक उपजाऊ के लिए गहरी दोमट मिट्टी भी उपयोग लाई जाती है और पीएच मान जो है वह 6.5 से 7.5 के मध्य होना चाहिए खाद का छिड़काव मिट्टी के परीक्षण के बाद ही संतुलित स्थिति में करना है सर्वश्रेष्ठ उपजाऊ देता है साथी ही बुवाई से 10 से 15 दिन पहले सड़ी हुई गोबर का खाद खेत में डालना चाहिए मक्की की फसल में 4 से 5 बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है किस फसल में आप का पौधा 20 से 20 सेंटीमीटर दूरी पर होना चाहिए जिससे आपको अच्छी पैदावार मिल पाएगी ।
    वीडियो के माध्यम से मक्का की खेती की पूरी जानकारी

     

    * उड़द की खेती कैसे होती है

    उड़द की फसलें गर्म जलवायु प्रकाश काल के भीतर अच्छा उत्पादन प्रदान करती है इनके लिए 25 से 30 डिग्री तापमान अच्छा होता है 700 से 900 मिलीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में इनका उत्पादन अच्छा होता है और फुल अवस्था पर यदि वर्षा होती है तो यह इसके लिए हानिकारक है खरीफ कालीन तथा जायद कालिन फसल मानी जाती है बलुई मिट्टी तथा गहरी काली मिट्टी में इसका उत्पादन किया जाता है जिस का पीएच मान 6.5 से 7.8 तक होना चाहिए आप उड़द को मक्का बाजरा सूरजमुखी जैसी फसलों के साथ एक साथ लगा सकते हैं उड़द की फसल में पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर होना उचित फसल के लिए अच्छा होता है और बीच को 4 से 6 सेंटीमीटर size की गहराई पर बोना अच्छा होता है
    उड़द के भाव क्या है
    उड़द के भाव क्या है उड़द के भाव क्या है[/caption]
     मंदसौर मंडी भाव उड़द
    बीज की मात्रा -
    खरीफ में उड़द के बीच की मात्रा 12 से 15 kilogram किलोग्राम प्रति एक्टर होनी चाहिए
    और ग्रीष्मकालीन बीज की मात्रा 20 से 25 किलोग्राम प्रति एक्टर होनी चाहिए
    सिंचाई का समय - खरीद के समय उड़द की फसल में सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है यह वर्षा के जल से ही सिंचाई होती है और यदि वर्षा का अभाव हो तो एक सिंचाई आवश्यक होती है अन्यथा नहीं
    और जायद में इस फसल को तीन से चार सिंचाई की आवश्यकता होती है
     
    विशेष बिंदु-
    भूमि की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई 3 वर्ष में एक बार अवश्य करवाएं
    पोषक तत्वों की मात्रा fresh मिट्टी परीक्षण के बाद ही तय करें
    बुवाई पूर्वक बीज उपचार जरूर करें
    रोग प्रतिरोधक दवाइयों का उपयोग अपने क्षेत्र में रोग का अनुकूलन करने के बाद ही करें ।
    उड़द की खेती कैसे होती है जानकारी वीडियो के माध्यम से
     

    * सोयाबीन की खेती कैसे होती है ?

    सोयाबीन मुख्य रूप से खरीफ के समय की जाती है क्या फसल वर्षा पर निर्भर रहती है इस फसल में 20 प्रतिशत तेल व 40% प्रोटीन पाया जाता है और इससे अब इनका उपयोग दूध आटा पनीर एवं कई प्रकार के व्यंजनों को बनाने में किया जाता है इस फसल को अधिक मात्रा में उगाया जाता है

    सोयाबीन की फसल के लिए जलवायु -जिस समय सोयाबीन की बुआई होती है वह समय सुस्त गर्म जलवायु होना चाहिए इस फसल में तापमान 20 से 30 डिग्री के बीच होना चाहिए इस फसल के लिए 50 से 70 सेंटीमीटर वर्षा अच्छी मानी गई है

    सोयाबीन का भाव मंदसौर मंडी Soyabin bhav krishiupaj Mandi madhya pradesh
    सोयाबीन का भाव मंदसौर मंडी सोयाबीन का भाव मंदसौर मंडीSoyabin bhav krishiupaj Mandi madhya pradesh[/caption]

     

    मिट्टी का चुनाव -

    सोयाबीन की खेती के लिए चिकनी मिट्टी को छोड़कर आप अन्य मिट्टीयो में इस फसल को लगा सकते हैं यह अच्छी पैदावार वाली फसल है यह चिकनी मिट्टी में भी पैदा हो सकती है किंतु इसकी पैदावार कम होगी लेकिन यदि आपके पास चिकनी मिट्टी की है तो आपको थोड़ी कम पैदावार के साथ सोयाबीन आप उसमें लगा सकते हैं

    बुवाई का समय-

    सोयाबीन की फसल को बारिश के समय में बोना चाहिए इस फसल को जून से जुलाई में बारिश के हिसाब से बोलना चाहिए सोयाबीन बोने से पहले भूमि में 10 सेंटीमीटर तक नमी होना आवश्यक है जिससे बीज अंकुरण अच्छा होता है

    और साथ ही बीच की गहराई लगभग 3 सेंटीमीटर तक होना चाहिए

    सिंचाई का समय- खरीफ की फसल होने के कारण इस फसल को सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती किंतु यदि बारिश का अभाव हो और सोयाबीन की फसल फूल तथा फली जनन की स्थिति में हो तो आपको जरूरत के हिसाब से पानी सीचना चाहिए जिससे आप की पैदावार अच्छी हो

     

    विशेष बिंदु -

    सोयाबीन की फसल को होने से पहले बीज उपचार करना अति आवश्यक है

    मिट्टी परीक्षण करवाएं ताकि खेत की उर्वरकों की सही जानकारी आपको मिल जाए जिसके मुताबिक आप खाद डाल सके

    इस फसल में 20 से 25 दिनों तक आपको खरपतवार पर नियंत्रण रखना होगा

    दवाइयों का छिड़काव आपको समय वह मौसम के अनुकूल ही करना चाहिए जिससे फसल पर कोई उल्टा प्रभाव ना पड़े ।

    सोयाबीन की खेती कैसे होती है जानकारी वीडियो के माध्यम से

     

    * गेहूं की खेती कैसे होती है ?

    बुवाई का समय-
    अक्टूबर और नवंबर का महीना इस फसल की बुवाई के लिए काफी अच्छा है
    इस फसल के लिए आप गोबर की खाद को जुदाई के समय अच्छी तरह डाल कर उसके बाद ही बीज की बुवाई करें
    बुवाई के लिए बीज की मात्रा 1 एकड़ के लिए आपको 50 से 60 किलोग्राम बीच की आवश्यकता पड़ती है
    बीज बोने से पहले बीज उपचार जरूर करें ताकि आप की फसल की पैदावार अधिक हो
    मंदसौर मंडी गेहूं भाव

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    * चना की खेती कैसे होती है ?

    चने की बुवाई का समय-
    अक्टूबर से नवंबर के महीने में मुख्य रूप से इसकी बुवाई की जाती है तथा कपास और धान के खेतों में बुआई करने वाले किसान 15 दिसंबर तक इसकी बुवाई का काम निपटा लेवे और इससे अधिक देरी बुवाई में करने पर इसके उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है
    बीज दर- छोटे दाने वाले चने के बीज को 60 से 70 प्रति एक्टर और काबुली चने के बीज को 80 से 85 किलो प्रति एक्टर पर बुवाई करना चाहिए और बीच की गहराई 8 सेंटीमीटर तक रखना उत्तम होगा इसका यह फायदा है कि ज्यादा गहरा चना बोने पर रोग कम लगता है  और इस फसल में पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए और लाइन से लाइन की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए
    चने की अच्छी पैदावार देने वाली किस्मे - विशाल, फुले विक्रम, फूले विक्रांत, फुले विश्वास, आदि
    मंदसौर मंडी चना भाव आज के
    मंदसौर  मंडी  भाव चना मंदसौर  मंडी  भाव चना mandsaur mandi chana bhav[/caption]
    मंदसौर  मंडी  भाव चना

    सिंचाई का समय -

    पहली सिंचाई बुवाई के समय करें उसके बाद दूसरी सिंचाई फूल आने पर करें तथा तीसरी सिंचाई पाली बनने से पूर्व करें
     
    विशेष बिंदु-
    किसी भी प्रकार की कीटनाशक का उपयोग करने से पहले मिट्टी की जांच करवा ले और उसी अनुसार कीटनाशक का उपयोग करें
    बीज को बोलने से पहले विचार अवश्य करें
    सिंचाई को वातावरण अनुकूल भी प्रभाव पड़ता है इसलिए वातावरण की गर्म या ठंडा होने पर उसके अनुकूल सिंचाई के समय को बड़ा और घटा लेना चाहिए।
    चने की खेती कैसे होती है जानकारी वीडियो के माध्यम से
     

    * लहसुन की खेती कैसे होती है ?

    लहसुन की फसल के लिए खेत की तैयारी आवश्यक है आप खेत तैयार करते समय गहरी जुताई करवाएं और गोबर की अच्छी पकी खाद दो से तीन ट्राली डालें और उसके पश्चात रोटावेटर से खेत को समतल करवाएं
    बुवाई का समय- लहसुन की फसल के लिए उन्नत समय सितंबर से अक्टूबर होता है
    तापमान- इस फसल के लिए 15 डिग्री से 30 से 35 डिग्री तापमान फसल अनुकूल रहता है
    मिट्टी- लहसुन की फसल के लिए सोहेल मिट्टी काली मिट्टी दोमट मिट्टी आदि पर इसकी उन्नत खेती कर सकते हैं इस का पीएच मान 5 से 5.7 तक रहना चाहिए
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    मंदसौर मंडी लहसुन भाव garlicmandsaur 
    बीच का चुनाव -
    आपको प्रथम मिट्टी परीक्षण करवाना चाहिए उसके बाद ही उसके अनुकूल लहसुन के बीच का चयन करना चाहिए ताकि उसमें उन्नत पैदावार हो
    बीज की मात्रा बीच के आकार पर निर्धारित रहती है यदि बीच बड़ा या छोटा है तो उस हिसाब से ही प्रति एक्टर आपको भी ज्यादा या कम लग सकता है यदि औसत रूप से देखा जाए तो 160 से 170 kilogramकिलो ग्राम बीच की आवश्यकता प्रति एक्टर पड़ती है
     
    बुवाई की जानकारी -
    इस फसल को मशीन तथा हाथों द्वारा दोनों ही विधियों से बुवाई करी जाती है बस आपको ध्यान यह रखना है कि बीच से बीच की दूरी 3 से 4 इंच  और लाइन से लाइन की दूरी भी 3 से 4 इंच ही रखनी है
     
    सिंचाई का समय -
    इस फसल में 10 से 12 दिनों के अंतराल में सिंचाई की जाती है किंतु आप आपके तापमान तथा मिट्टी के अनुकूल सिंचाई के दिनों में बढ़ोतरी या कमी कर सकते हैं इस फसल में आपको सिंचाई का सही तरीके से ध्यान रखना आवश्यक है
     
    विशेष बिंदु -
    बीज को बोलने से पहले बीज उपचार अवश्य करें
    कीटनाशक तथा खाद का उपयोग रोगों तथा मिट्टी परीक्षण के बाद ही करें
    लहसुन की खेती कैसे की जाए जानकारी वीडियो के माध्यम से
     

    * मेथी की खेती कैसे होती है  ?

    बुवाई का समय-
    इस फसल की बुवाई आप अक्टूबर-नवंबर दिसंबर तथा जनवरी में कर सकते हैं बुवाई से पहले आप गोबर के खाद का प्रयोग कर सकते हैं
    जमीन का पीएच मान 8.2 तक ही होना चाहिए
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    मंदसौर मंडी मेथी भाव
     
    खेत की तैयारी-
    इस फसल के लिए खेत की तैयारी में आप दो बार गहरी जुताई करवाएं और एक हल्की जुताई करवाएं ताकि बड़े पत्थर खेत में ना रहे और साथ ही आपको गोबर की खाद का उपयोग करना है प्रति एक्टर आपको 15 से 20 ट्रॉली खाद अच्छा रहता है
     
    बुवाई का समय -
    नवंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह में इसकी बुवाई कर देना चाहिए यह इसकी बुवाई का सबसे अच्छा समय है
    इस फसल को यदि आप सब्जी के रूप लेना चाहते हैं तो आप इसे अक्टूबर के महीने में भी भी बुवाई कर सकते हैं
     
    सिंचाई का समय -
    इस फसल में आपको लगभग 4 सिंचाई करनी है सिंचाई को आप मौसम तथा तापमान के अनुकूल करें और यदि आप इस फसल को सब्जी के रूप में लेना चाहते हैं तो 3 से 4 इंच ऊपर से फसल की कटाई करें ताकि अगली बार आपको अच्छा फुटाव मिलेगा
    यह फसल सब्जी के रूप में लेने के लिए 20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है
    मेथी की खेती कैसे करें जानकारी वीडियो के माध्यम से
     

    * सरसों की खेती कैसे होती है ?

    बुवाई का समय-
    इस फसल का बुवाई का समय 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक रखना बहुत ही लाभदायक होता है

    सरसों के मंडी भाव

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    मंदसौर मंडी भाव सरसों आज के
     
    बीज दर-
    इस फसल की बीज दर 3 से 4 किलो प्रति हेक्टयर रखना है तथा हाइब्रिड बीजो की बीज दर 1 किलो प्रति एक्टर रखना है और साथ ही यदि आप घर का बीज उपयोग में ला रहे हो तो आपको बीज उपचार अवश्य करना है और हाइब्रिड बीजों का उपयोग कर रहे हो तो उसमें इसकी आवश्यकता नहीं होती है
    यदि इस फसल को आप कतार में बोलना चाहते हो तो कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए और लाइन से लाइन की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए
     
    सिंचाई का समय-
    सरसों की फसल में बुवाई के बाद दिए जाने वाले पानी के अलावा तीन और सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है किंतु कुछ क्षेत्रों में तापमान में बदलाव के कारण सिंचाई की संख्या में वृद्धि या कमी हो सकती है और आपको सिंचाई भी तापमान की अनुकूल ही करनी है
    इसमें आपको पहली सिंचाई फूलों के बनते समय और दूसरी सिंचाई फलियों के बनते समय तथा आखरी सिंचाई जब फलिया विकसित रूप में जाने वाली होती है उस समय करना है
     
    विशेष बिंदु -
    कीटनाशक तथा खाद का उपयोग मिट्टी परीक्षण के बाद तथा रोगों की सही पहचान या किसी कृषि विशेषज्ञ जानकारी के बाद ही कीटनाशक व खाद का उपयोग करें
    सरसों की खेती कैसे करें जानकारी वीडियो के माध्यम से
     

    * प्याज की खेती कैसे होती है ?

    यह फसल रवि तथा खरीद दोनों ही मौसम में लगाई जाती है इस फसल को बोलने के लिए आपको पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है जो कि 20 से 25 दिन पहले की जाती है उसके बाद इसकी रोपाई करके इसको खेत में लगाया जाता है इस फसल की खेती आप सभी मिट्टियों में कर सकते हैं बस मिट्टी उपजाऊ होना चाहिए सिर्फ इसकी अधिक उपज के लिए आपको मिट्टी थोड़ी हल्की होना आवश्यक है जिससे इसका कंद बड़ा हो सके यदि मिट्टी भारी होगी तो या सख्त होगी तो कंद बड़ा नहीं हो पाएगा
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    जलवायु-
     जलवायु के बारे में कहा जाए तो बुवाई के समय तथा फसल जब खेत मे लगी रहती है वहां तक कोई समस्या नहीं है किंतु जब फसल को खेत से बाहर निकालकर काटने के लिए रखा जाता है उस समय बारिश नहीं होनी चाहिए नहीं तो प्याज की स्टोरेज क्षमता घट जाती है और प्याज सर सकते हैं
     
    सिंचाई का समय -
    इस फसल की सिंचाई आपको जलवायु तथा तापमान के अनुकूल ही करना है
    प्याज की खेती कैसे होती है जानकारी वीडियो के माध्यम से
     

    * मटर की खेती कैसे होती है  ?

    इस फसल के लिए अधिक उपयोगी मिट्टी हल्की दोमट मिट्टी, काली दोमट मिट्टी, दोमट मिट्टी, इसके लिए अधिक उपजाऊ होती है बाकी अन्य दूसरी मिट्टियों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है इसका पीएच मान 6 से 7.5 मान्य होता है

    मंदसौर मंडी भाव मटर

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    Disclaimer- Mandsaurtoday.com पर उपलब्ध सभी भाव अखबारों तथा कृषि चैनल और लोकल कृषि मंडी के भावो पर आधारित है कृपया अपनी फसल बेचने या खरीदने से पहले अपने निकटतम मंडी में जाकर भाव की पुष्टि कर ले ।

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