अफीम समाचार: डोडे सूखने लगे और अभी तक फसल लेने की गाइडलाइन नहीं आई, किसान चिंतित- कम अफीम निकली तो कटेंगे पट्टे

अफीम समाचार: डोडे सूखने लगे और अभी तक फसल लेने की गाइडलाइन नहीं आई, किसान चिंतित- कम अफीम निकली तो कटेंगे पट्टे

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अफीम न्यूज: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने इस बार वित्त मंत्रालय की नई अफीम नीति के तहत मंदसौर नीमच और रतलाम जिले में अफीम की खेती करने वाले 30032 किसानों को सामान्य तरीके से अफीम के पट्टे वितरित किए थे। वहीं विदेशों में होने वाली अफीम की खेती की तर्ज पर नई सीपीएस पद्धति से 6 आरी के पट्टे अफीम किसानों को वितरित किए थे। यह अफीम किसानों के लिए अफीम नीति में नए अफीम समाचार थे। वर्तमान में अफीम की खेती कर रहे हैं किसानों के खेत में अफीम के डोडे आने लगे हैं। लगभग 10 दिनों बाद पुरानी पद्धति से अफीम के पट्टे प्राप्त करने वाले किसान अफीम डोडा में चीरा लगाकर अफीम लेना शुरू करेंगे। जीपीएस पद्धति वाले किसानों के यहां से अफीम के डोडे विभाग या निजी कंपनी वाले लेकर जाएंगे। जो अफीम से पोस्ता निकालकर दाने किसानों को देगी। जीपीएस पद्धति वाले किसानों की अफीम फसल तैयार होने को आई है लेकिन अभी तक नारकोटिक्स विभाग द्वारा अफीम निकालने की गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।

मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले के किसान चिंतित: अफीम कम निकली तो कट जाएंगे पट्टे

अफीम समाचार: अभी तक नारकोटिक्स विभाग की गाइडलाइन नहीं आने के कारण रतलाम नीमच और मंदसौर जिले के अफीम किसान चिंतित है। पिछले 3 दिनों में अचानक मौसम में बदलाव आने लगा है जिससे अफीम की फसल पर असर पड़ना शुरू हो गया है। ठंड का मौसम चला गया है और दिन में तेज गर्मी पड़ने लगी है, जिससे अफीम की फसल सूखना शुरू हो चुकी है। अभी तक नारकोटिक्स विभाग की गाइडलाइन की अफीम खबर नहीं आने से किसान इसलिए चिंतित है क्योंकि डोडे सूखने के कारण अफीम की मात्रा कम मिलेगी। अगर अफीम कब मिलेगी तो अफीम किसानों के पट्ठे काट दिए जाएंगे।

वित्त मंत्रालय की नई अफीम नीति ने 3 साल बाद काले सोने का रकबा

अफीम खबर: काले सोने के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी अफीम की खेती मंदसौर नीमच और रतलाम जिले के किसान 2850.20 हेक्टेयर में अफीम की खेती कर रहे हैं। वर्ष 2022-23 की अफीम नीति वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित की गई थी जिससे 3 सालों बाद दोबारा अफीम का रकबा बढ़ा दिया है। वर्तमान में अफीम किसानों की अफीम फसल में सफेद फूल डोडे का रूप लेने लगे हैं। डोडे बड़े होने के बाद किसान की फसल से डोडे पर चार या पांच चीरे लगाकर अफीम संग्रहित करने लगेंगे। अप्रैल महीने के आखिरी दिनों में विभाग अफीम तुलाई का कार्य शुरू करेगा। केंद्र सरकार ने इस बार अफीम और डोडा चूरा की तस्करी रोकने के लिए विदेशी सीपीएस पद्धति अपनाई है। नई पद्धति से खेती करने वाले अफीम किसानों को नुकसान का अंदेशा है। इसीलिए पिछले दिनों किसानों ने न्याय यात्रा निकालकर सीपीएस पद्धति खत्म कर पुरानी पद्धति के अनुसार अफीम पर चीरा लगाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था।

क्या है अफीम की नई सी पी एस पद्धति

अफीम न्यूज: विदेशों में अफीम की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लोड एस ए कांस्टेंट पापीस्टा ( सीपीएस) पद्धति से खेती होती है। इसमें विभाग और प्रशासन किसानों से डोडे लेता है और मशीन द्वारा उसमें से अफीम निकालता है। इसके बाद अफीम में से पोस्ता निकाल कर किसानों को दे दिया जाता है। चीन ,आस्ट्रेलिया सहित एक अन्य देशों से अमेरिका , जापान और अन्य देशों की मेडिकल कंपनियां अधिक मांग करती है। वर्तमान में दुनिया के कई देशों में यही प्रक्रिया चल रही है। हालांकि भारत देश में पहली बार सीपीएस पद्धति के तहत किसानों को अफीम के पट्टे जारी किए गए हैं। अगर इस वर्ष अफीम की सीपीएस पद्धति सफल रही तो अगले वर्ष इसी पद्धति से अफीम पट्टे देने की संख्या बढ़ा दी जाएगी। सीपीएस पद्धति प्रदेश में हो रहे डोडा चुरा और अफीम की तस्करी को रोकने में मदद करेगी।

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