मंदसौर में राजनीति और प्रक्रियाओं के बीच उलझ गया शहर का मुख्य मार्ग, डामरीकरण के लिए फिर से निकाले गए टेंडर

मंदसौर नीमच मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति नहीं बदल रहीं 2021



मंदसौर टू नीमच मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति अभी तक नगर पालिका और प्रशासन नहीं बदल पा रहा है। सीसी रोड से लेकर यह काम गुराडिया नाका से लेकर बीपीएल चौराहे तक होना है। मुख्य मार्ग के इस विषय को लेकर पिछले 2 सालों से भयंकर राजनीति चल रही है और इनके कारण शहर के आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अभी तक इस रोड की स्थिति नहीं बदल पाई है और रोड के प्रोजेक्ट पर राजनीति का ग्रहण लग गया है। इसी कारण लंबे समय बाद भी इसका कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। डामरीकरण वाले गुजरात के ठेकेदार ने तो काम नहीं करने की बात लिख कर दे दी। यह देख विभाग ने ठेकेदार को ही ब्लैक लिस्ट में डाल दिया। अब सीसी का काम जिसे करना है वह भी अनुबंध में ही अटका हुआ है।




फिर से शुरू होगी टेंडर की प्रक्रिया




यह टेंडर निरस्त होने के बाद प्रशासन का कहना है कि अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। ऐसी स्थिति में दो हिस्से में होने वाले इस कार्य को फिर से देरी होगी। हालांकि पहले ही इस प्रोजेक्ट को काफी लंबा समय हो चुका है। बारिश के दिनों में पूरी तरह जर्जर हो चुकी और सड़क से गिट्टी बाहर आने लगी और पूरी तरीके से बदहाल हो चुके मार्ग पर फिलहाल तो पैच वर्क किया जा चुका है लेकिन इसका कायाकल्प मंजूरी के बाद भी नहीं हो पा रहा है। भोपाल से भी इस रोड को बनाने के लिए मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए 10 करोड़ रुपए की मंजूरी भी मिली है। इसका ठेका आरोपी कंस्ट्रक्शन ने ले रखा है जो स्थानीय स्तर पर आ रही परेशानियों से अब इसमें रुचि नहीं बता रहा है। 




कभी प्रक्रियाएं तो कभी राजनीति दे रही रोड सवारने में अड़चन




कभी विभाग की परेशानियां तो कभी राजनीतिक मामले सामने आने के कारण रोड की हालत सही नहीं हो पा रही है। विभाग के चीफ ऑफिस से अनुबंध का पत्र मिलने के बाद ठेकेदार को भेजा जाना है। अगर यह अनुबंध करने नहीं आया तो टेंडर निरस्त कर दिए जाएंगे और दोबारा से नए टेंडर लिए जाएंगे। शहर का मुख्य मार्ग जो लंबे समय से अटका हुआ है यह दो हिस्सों में होना है। इसका खामियाजा इसे रोड से गुजरने वाला आम आदमी रोजाना भुगत रहा है।पहले हिस्से में भुनिया खेड़ी से लेकर काबरा पेट्रोल पंप तक सीसी रोड बनाया जाएगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली है। वही यहां से बीपीएल चौराहा तक करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में एक करोड़ से अधिक लागत में बनना था। उसके बाद ठेकेदार ने कार्य नहीं किया तो विभाग ने पत्राचार कर दिया और जब ठेकेदार ने रोड बनाने से इंकार कर दिया तो विभाग ने उसे ब्लैक लिस्टेड कर फिर से नई टेंडर प्रक्रिया चालू कर दी।

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