मंदसौर: शिवना का पानी दूषित, दम घुटने से मर रही मछलियां, रोजाना बढ़ता जा रहा शिवना में प्रदूषण

 

शिवना का पानी दूषित होने से मछलियों का दम घुट रहा और हो रही कई जलीय जीवों की मौत 2021



मंदसौर शहर की प्यास बुझाने वाली शिवना नदी अब खुद के तारणहार का इंतजार कर रही है। मंदसौर में शिवना नदी की हालत पशुपतिनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र में ऐसी हो गई है कि शिवना नदी का पानी पीने लायक तो छोड़ो वह अब नहाने लायक भी नहीं बचा है। शहर के गंदे नाले का पानी लगातार नदी में मिलने के कारण पानी इतना दूषित हो गया है कि पानी में ऑक्सीजन की कमी हो गई है और इस कारण मछलियों समेत सभी जलीय जीवो के दम घुटने लगे हैं और उनकी मौत होने लगी है। रोजाना पशुपतिनाथ मंदिर और आसपास के क्षेत्र में नदी के किनारे पर बड़ी मात्रा में मछलियां मरी हुई मिल रही है। इस पर प्रशासन और नगर पालिका ध्यान नहीं दे रही है और बस सीवरेज लाइन के भरोसे ही बैठी है। 



पिछले 20 साल से नदी प्रदूषण मुक्त होने का इंतजार कर रही है



यह कोई नया मामला नहीं है बल्कि पिछले 20 सालों से शिवना नदी खुद को शुद्ध होने का इंतजार कर रही है। प्रतिवर्ष इसके लिए बजट भी मिलता है लेकिन नदी शुद्ध नहीं हो पाती है। शिवना नदी को शुद्ध करने के लिए नगरपालिका अभी तक ढाई करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है लेकिन अभी तक गंदे नाले का पानी शिवना में मिलने से रोकने में सफल नहीं हो पाई है। नगर पालिका के प्रयास दावो से आगे नहीं बढ़ रहे हैं और नगर पालिका अभी तक प्लानिंग में ही उलझी हुई है। शिवना नदी का पानी बारिश के मौसम में 2 महीने तक शुद्ध रहता है और उसके बाद शहर के गंदे नाले का पानी उसमें लगातार मिलने के कारण कुछ दिनों में नदी प्रदूषित हो जाती है और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बिल्कुल कम हो जाती है।




इतना प्रदूषित पानी की दम घुटने से रोजाना मछलियां मर रही है





गंदे की लगातार नदी में मिलने से पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि उस में ऑक्सीजन की मात्रा बिल्कुल कम हो गई है और रोजाना मछलियों के अलावा अन्य जलीय जीव का दम घुटने से मौत हो रही है। नदी में गंदगी के साथ मरी हुई मछली अभी दिख रही है। अभी भी रोजाना नदी में गंदगी बढ़ती जा रही है और मछलियां पानी में नहीं रह पा रही है। नदी में लगातार बढ़ रही गंदगी प्रशासन और नगर पालिका की उदासीनता को बयां कर रही है। शिवना नदी को शुद्ध करने की बात तो दूर इसमें गंदगी नहीं मिले इसके लिए प्रयास भी शुरू नहीं हो चुके हैं। शिवना शुद्धिकरण को लेकर अभी तक योजना बहुत सारी बन चुके हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। शिवना शुद्धिकरण को लेकर 100 करोड रुपए की योजना बनाई जा चुकी है लेकिन इसकी मंजूरी कब होगी यह मैं नहीं किसी को नहीं पता है।




पशुपतिनाथ मंदिर से लेकर मुक्तिधाम तक नदी में सबसे ज्यादा प्रदूषण है




शिवना नदी पूरी तरीके से प्रदूषित हो चुकी है और इसमें सबसे अधिक गंदा पानी पशुपतिनाथ मंदिर से लेकर मुक्तिधाम तक हो रहा है। पशुपतिनाथ मंदिर से लेकर मुक्तिधाम तक नदी में लगभग 10 गंदे पानी के नाले मिल रहे हैं। नदी में विभिन्न प्रकार की सामग्रियां बहाई जा रही है। नाली में जलकुंभी को लेकर अन्य प्रदूषित पानी मिलने के कारण नदी की हालत बिगड़ती जा रही है। गंदगी एकत्रित होने के कारण नदी से दुर्गंध आ रही है यह हालत हो गई है कि पुलिया से निकलने वाले हर व्यक्ति को प्रदूषित वातावरण का सामना करना पड़ रहा है। अगर इसको सीधा कहा जाए तो शिवना नदी एक प्रकार से गंदा नाला बन चुकी है। अगर इसको अभी से नहीं रोका गया तो शहर में जल संकट पैदा हो सकता है।

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