यूरिया कट्टे का काम करेगी छोटी शीशी, किसानों की खाद की किल्लत दूर करने के लिए किसानों को मिलेगा नैनो यूरिया का सहारा

 पूरे यूरिया कट्टे का काम करेगी नैनो यूरिया की शीशी 2021




किसानों को प्रति वर्ष फसल बोवनी के बाद खाद की किल्लत आ जाती है। अब किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा क्योंकि यूरिया की किल्लत को दूर करने के लिए नैनो यूरिया का उत्पादन शुरू हो चुका है। सबसे पहले यह उत्तर प्रदेश के किसानों को उपलब्ध कराया गया था और उसके बाद अब मध्य प्रदेश के किसानों को उपलब्ध कराने के लिए कार्यवाही चल रही है। इसका परिणाम अभी तक देखने को नहीं मिला है। गेहूं और सरसों की फसलें पकने के बाद ही पता चलेगा कि नैनो यूरिया फसलों के लिए कितना लाभदायक रहेगा। फसलों की कटाई के बाद है इसके फायदे सामने आएंगे। इसके लिए कुछ समय पहले भी किसानों को सुझाव दिया गया था हालांकि उस समय यह ज्यादा उपलब्ध नहीं हो सका था।



नैनो यूरिया नया, तरल एवं अनोखा रासायनिक खाद है



नैनो वर्क एक प्रकार का अनोखा खाद है। यह एक प्रकार का तरल और नया है। इसे इसको ने नैनो बायोटेक्नोलॉजी के रिसर्च सेंटर में अपनी पेटेंटेड तकनीक से विकसित किया है। इसको ने अपने इस उत्पाद को दुनिया के सामने मई में पेश किया था। इस को सबसे पहले उत्तर प्रदेश के लोगों को उपलब्ध कराया गया और अब मध्यप्रदेश में गेहूं के लिए तरल नैनो यूरिया का प्रचार किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि जल्द ही प्रदेश और जिले में नैनो यूरिया उपलब्ध करा दिया जाएगा। फिलहाल जिले में नैनो यूरिया सीमित मात्रा में मंगवाया गया है क्योंकि किसानों को इसका उपयोग करने के लिए पहले प्रेरित किया जाएगा और अगर रिजल्ट अच्छा रहा तो बड़ी मात्रा में इसकी मांग की जाएगी।



दिसंबर के पहले सप्ताह मे नैनो यूरिया जिले में उपलब्ध हो जाएगा 



कृषि अधिकारियों ने कहा है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में मंदसौर जिले में नैनो यूरिया मुख्य केंद्रों पर उपलब्ध करवा दिया जाएगा। आगर जिले में नैनो यूरिया का परिणाम अच्छा रहा तो उसके बाद इसकी मांग में वृद्धि की जाएगी। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक चुंडावत के अनुसार इफको नैनो यूरिया का एक कारण 30 नैनोमीटर का होता है। अपने अति सूक्ष्म आकार और सतही विशेषताओं के कारण नैनो यूरिया को फसल के पत्तियों पर छिड़के जाने से पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है। यहां पर पौधे को पोषक तत्व प्रदान करते हैं। यह सस्ता भी है और कम मात्रा में अधिक असर करेगा। जल्द ही जिले में यह उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

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