सामने से तिरछा नजर आता है मंदसौर का कुबेर मंदिर, मंदिर में एक भी नींव नहीं है

 

मंदसौर में कुबेर जी का 1400 वर्ष पुराना रहस्यमयी मंदिर है 




मंदसौर में कुबेर जी का एक ऐसा मंदिर स्थित है जो कई रहस्यों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर कुबेर भगवान शिव जी और गणेश जी के साथ विराजित है। हर साल कुबेर भगवान के यहां पर धनतेरस के पर्व पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। पूरे साल में धनतेरस के पर्व पर कुबेर जी के मंदिर में धूमधाम से कार्यक्रम होते हैं और कुबेर जी का मुख्य दिन होने के कारण धनतेरस पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। सुबह 4:00 बजे से दूर-दूर के श्रद्धालु मंदिर में आ जाते हैं और अगले दिन सुबह तक हम मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।




मंदिर में एक भी नींव नहीं है




पुराने इतिहास के अनुसार कुबेर जी के इस मंदिर में एक भी नींव नहीं है। मंदसौर में स्थित कुबेर भगवान के मंदिर का इतिहास 1400 वर्ष पुराना है। इस मंदिर का एक रहस्य यह भी है कि आज भी यहां मंदिर सामने से देखने पर भक्तों को तिरछा ही नजर आता है। मंदिर पुराने चित्रकारों के अनुसार बनाया गया है इसलिए भक्तों को सिर झुका कर ही मंदिर में प्रवेश करना पड़ता है। इस मंदिर में कुबेर भगवान के साथ शिव जी अपने भव्य लिंग रूप में विराजित है। भगवान कुबेर की प्रतिमा दीवार पर विराजित है। भगवान कुबेर का पेट बड़ा, एक हाथ में धन की थैली तो दूसरे हाथ में प्याला धारण किए हुए हैं। मूर्ति की ऊंचाई 3 फीट है। पुराने पुरातत्व के अनुसार यह स्थान तंत्र करने के लिए सही है क्योंकि यहां पर भगवान कुबेर और शिवजी एक साथ विराजित है। 




प्राचीन मंदिर होने के कारण इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाता है



कुबेर जी को धन का देवता माना जाने के कारण धनतेरस पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। प्राचीन मंदिर होने के कारण भक्तों के लिए आस्था का यह एक खास केंद्र है। कई वर्षों पुराना मंदिर होने के कारण मंदिर की संरचना में बदलाव नहीं किया जा सकता है। प्रशासन द्वारा मंदिर के संरक्षण के लिए जल्द ही प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। मंदिर की संरचना में बदलाव नहीं किया जाएगा लेकिन जीणोद्धार व अन्य सुविधाओं के लिए जल्द ही प्रस्ताव तैयार हो जाएगा। दीपावली के पांचो दिन यहां पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। कलेक्टर गौतम सिंह द्वारा कल सुबह पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद हवन किया जाएगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ