मिलावटी मावे से सावधान: मध्यप्रदेश का मावा दिल्ली मुंबई तक जा रहा, दीपावली पर 6 करोड़ का काला बिजनेस

 

मध्यप्रदेश के मिलावटी मावे से सावधान 2021




सभी देशवासियों दीपावली के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाते हैं और लगभग हर घर में मिठाई अवश्य बनाई जाती है। उसके लिए लोग बाजार से मावा खरीदते हैं लेकिन आपको अब सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि मध्यप्रदेश में बन रहा मिलावटी मावा आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मध्यप्रदेश का डकैती में प्रसिद्ध इलाका अब भारी मात्रा में मिलावटी मावा बना रहा है और देश के बड़े-बड़े शहरों में भेज रहा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश के अकेले भिंड जिले में रोजाना 10 टन मिलावटी मावा बनकर तैयार हो रहा है और देश के कोने-कोने में भेजा जा रहा है। दीपावली पर करीब भिंड जिले में 6 करोड़ का व्यापार होता है।




150 रूपए किलो में तैयार हो जाता है फर्जी मावा




जानकारी के मुताबिक पता चला है कि मिलावटी मावा बनाने वाले हैं डेढ़ सो रुपए की लागत से 1 किलो मावा बना देते हैं जो दीपावली के पर्व पर ₹400 किलो में ताजा मावे के नाम पर बेचा जाता है। रिसर्च करने पर पता चला है कि अकेले भिंड जिले में मिलावटी मावा बनाने की 100 से अधिक फैक्ट्रियां मौजूद है जो दीपावली के पर्व पर भारी मात्रा में मिलावटी मावे का निर्माण करती है और दक्षिण भारत सहित पूणे, नागपुर ,दिल्ली ,आगरा ,मथुरा तक इसे भेजा जाता है।




कैसे बनाया जाता है मिलावटी मावा




रिसर्च और जांच करने पर पता चला है कि फैक्ट्री वाले दूध खरीद कर इसमें से वसा को पूरी तरह से निकाल लेते हैं। दूध में पर्याप्त पोषक की मात्रा को बनाए रखने के लिए लोग इसमें आलू, स्टार्च, रिफाइंड और अन्य प्रकार के केमिकल मिलाते हैं। दूध में से वसा की मात्रा निकाल लेने के बाद उसमें गुणवत्ता घट जाती है और इसको बढ़ाने के लिए लोग इसमें यूरिया और शैंपू जैसे घातक केमिकल्स को मिलाकर दूध को तैयार करते हैं। इसके बाद दूध की मात्रा बड़ी संख्या में बढ़ जाती है और इससे मामा तैयार कर लिया जाता है। इस प्रकार काम आवाज ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता है और 3 दिनों में बदबू मारने लगता है। तैयार किया गया मावा बदबू नहीं मारे इसलिए इसमें दोबारा केमिकल का उपयोग करके इसे ताजा रखा जाता है।




कौन-कौन से घातक केमिकल्स दूध में मिलाए जाते हैं



1- सर्वप्रथम दूध की मात्रा को बढ़ाया जाता है जिसके लिए दूध में यूरिया, शैंपू, फ़र्टिलाइज़र, अमोनिया ,रिफाइंड और ग्लूकोस मिलाया जाता है।



2- मिलावट वाला दूध में खटास पन पैदा नहीं हो इसलिए भारी मात्रा में न्यूट्रलाइजर मिलाया जाता है।



3- केमिकल्स होने के कारण यह दूध जल्द ही खराब हो जाता है इसके लिए इसको लंबे समय तक टिकाने के लिए हाइड्रोजन पराक्साइड और फॉर्मलीन मिलाया जाता है।



4- दूध में आलू ,आटा और स्टार मिलाया जाता है ताकि यूरिया और अमोनिया मिलाने से दूध का स्वाद नहीं जाए।


इस प्रकार से दूध में अनेक प्रकार के घातक केमिकल से मिलाकर मावा तैयार किया जाता है और देश के कोने कोने में भेजा जाता है। जानकारी में पता चला है कि इस काले कारोबार में 1500 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। रोजाना यह 10 टन से अधिक मिलावटी मावा तैयार करते हैं जिसमें सिर्फ 10 परसेंट ही पैसों की जरूरत होती है। ग्रामीण इलाकों पर इसका कारोबार किया जाता है ताकि पता नहीं चल सके। प्रति किलो मावे पर लगभग 100 से अधिक रुपए का मुनाफा होता है। लोग इसको खरीद लेते हैं और बिल्कुल भी भनक नहीं लग पाती है।




कैसे कर सकते हैं मिलावटी मावे की पहचान



1-फूड इंस्पेक्टर रीना बंसल ने जानकारी देते हुए बताया है कि आप दूध से तैयार मावे को सुनकर उसमें मिलाए गए रिफाइंड और वसा की पहचान कर सकते हैं। अगर दूध में इन चीजों को मिलाया गया है तो आपको दुर्गंध से पता चल जाएगा।



2- दूध में जिस कंपनी का रिफाइंड घी मिलाया जाता है उसकी सुनने पर दुर्गंध आ जाती है।



3- अगर आपको मामले में मौजूद स्टार्च और आलू के लिए पता करना है तो मावे को मावा आयोडीन के 1 मिलीलीटर लिक्विड में डालें। अगर वह नीला हो जाता है तो उसमें आलू और स्टार्च मिलाया गया है।



4- अगर आपको मामा खरीदे तो समय थोड़ी भी शंका होती है तो उसका तुरंत लैब परीक्षण करवाएं। आप फूड अधिकारियों को सैंपल भेज कर भी परीक्षण करवा सकते हैं।



अधिकारियों का कहना है कि इसकी रिपोर्ट थोड़े समय बाद आती है लेकिन तब तक आपको मिलावटी मावे पर भरोसा नहीं करना है। यह मिलावटी मावा आपके शरीर पर काफी खतरनाक साबित हो सकता है और पेट की घातक बीमारी हो सकती है। मिलावटी मावा आपके हृदय पर भी खतरनाक साबित हो सकता है। जिले में जुलाई से मिलावटी मावे की जांच की जा रही है जिसमें कुल 96 सैंपल लिए गए हैं। 13 सैंपल अमानक मिले हैं। 9 सैंपल में मिलावट नहीं मिली है। 47 सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी है। आप बस मावा खरीदते समय सावधानी बरतें।






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