मंदसौर की बेटी घरों में लगाती थी झाड़ू पोछा, हॉकी टीम में हुआ सिलेक्शन, जानिए कामयाबी की कहानी

 

मंदसौर की बेटी का हाकी टीम में चयन 2021



यह कहानी मंदसौर की बेटी सागु की है जिसमें किस्मत नहीं होते हुए भी जीत हासिल कर ली। रांची में 21 अक्टूबर से शुरू होने वाली हॉकी चैंपियनशिप टूर्नामेंट में हमारे मंदसौर की बेटी सागु डाबर का चयन हो गया है। साधु एक गरीब परिवार की लड़की थी जिसमें दिन-रात संघर्ष करके यह मुकाम हासिल किया है। सागु डाबर की स्थिति ऐसी थी की घरों में पत्रे लगे हुए थे और बारिश के मौसम में पानी टपकता था और सागु अपनी मां के साथ दूसरों के घरों में झाड़ू पोछा लगाने के लिए जाती थी और अपने घर का गुजारा करती थी। सागू को हॉकी खेलने में बड़ा मजा आता था और इसमें उसकी मम्मी भी उसे सहायता करती थी।सागु 22 अक्टूबर को अपना पहला मैच मध्यप्रदेश की तरफ से खेलेगी।



क्या है सागु के संघर्ष की कहानी



सागु अपनी मां के साथ मंदसौर में रहती है। सागु एक गरीब परिवार की लड़की है। सागु के पिता भुवान डाबर का देहांत कई वर्षों पहले हो चुका है। सागु अपनी पांच बहनों और तीन भाइयों में सबसे छोटी है।सागु की सबसे बड़ी दो बहनों की शादी हो चुकी है और थोड़े दिनों पहले ही एक भाई की करंट लगने से मौत हो गई थी।सागु की जिंदगी गरीबी में ही गुजर रही है।सागु अपनी मां के साथ दूसरों के घर पर झाड़ू पोछा करके जिंदगी का गुजारा बसेरा कर रही है और अपनी एक बहन और दो भाइयों के साथ कच्चे घर में ही रह रही है। यह शहर के महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय स्कूल में कक्षा 12वीं में पढ़ाई करती है।



कैसे आया सागु में हाकी खेलने का जुनून



सागु की मां ने बताया कि जब यह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी तो इसने अपने कक्षा की छात्रा को हॉकी खेलते हुए देखा तब से इसको भी हॉकी खेलने में इंटरेस्ट आ गया। घर की स्थिति खराब होने के कारण उसकी मां उसे हॉकी स्टिक नहीं दे सकती थी इसलिए उसको खुश करने के लिए पेड़ की टहनी पकड़ा दी थी। यह देख उसके एक दोस्त ने उसे पुरानी हॉकी स्टिक लाकर दे दी। इसके बाद उसकी मां ने धीरे-धीरे प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया।सागु रोज सुबह उधर 3 गाड़ियों की सफाई करती है जहां पर उसे 1500 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। वह खुद ही उसका खर्चा उठाती है। इसके अलावा उसकी बहन और दोनों भाई भी काम पर जाते हैं जिससे पूरे परिवार का पालन पोषण होता है।पुरा परिवार सागु पर उम्मीद लगाए बैठा है कि यही परिवार की किस्मत बदलेगी।



खेलने जाने के लिए उधार लिए थे पैसे



सागु की मां ने बताया कि टूर्नामेंट में जाने के लिए पैसे उधार लिए थे।इतनी गरीब होते हुए भी वह हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती है। इसलिए उसकी मां पर उसे सहायता करते हैं और कभी-कभी तो टूर्नामेंट खेलने के लिए उसे अपने कोच और साथियों से पैसे उधार लेने पड़ते थे। अगर इतने में भी जुगाड नही हो पाता था तो उसकी मां काम करने वाले से एडवांस में पैसे लाती थी। कभी-कभी तो वह 3 किलोमीटर पैदल चलकर भी प्रैक्टिस के लिए जाती थी। लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी। सागु को काम करने वाले मालिकों से भी कुछ मदद मिली और आज वह इस मुकाम पर पहुंच गई है कि आने वाले 23 नवंबर को वह मध्य प्रदेश की तरफ से हॉकी खेलेगी। अभी तक वह 7 राष्ट्रीय मैचों में हिस्सेदारी कर चुकी है। उसका सपना है कि एक दिन वह मेडल लेकर आएगी और देश का नाम रोशन करेगी।






एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ