मुआवजा भी नहीं दिया और किसान की छीन ली जमीन, एसडीएम और तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा किसान

 




मंदसौर जिले के करोड़ क्षेत्र से किसान की जमीन हड़पने का मामला सामने आया है। गरोठ ने नेशनल हाईवे निर्माण में किसानों की भूमि अधिग्रहण में शासन ने किसानों की समस्या और शिकायतों पर ध्यान देना उचित नहीं समझा जा रहा है। गांव बर्डिया आमरा के किसान की 22 आरी निजी भूमि पहले अधिग्रहण की गई और फिर अधिग्रहण में संशोधन के बाद भूमि को किसान के खाते से नेशनल हाईवे भारत सरकार के नाम दो आरी कम कर दी गई। इसके बदले में किसान को मुआवजा भी नहीं मिला है और सवाल यह उठ रहा है कि अगर किसान को जमीन का मुआवजा नहीं दिया है तो खाते से जमीन कैसे काट ली गई है।



पहले भी किसानों को हुई थी परेशानी



इस मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही भूमि पेड़ पौधों के मुआवजे में भी देरी होने के कारण किसानों की परेशानी सामने आई थी। नेशनल हाईवे से जुड़े इस मामले में गरोठ के कुछ किसान लगातार आवाज उठा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि अगर नेशनल हाईवे से जुड़े मुआवजा वितरण के मामले में जांच की जाए तो एक बड़ा खुलासा सामने आ सकता है। मौजा सही समय पर किसानों को नहीं देने और भूमि अधिग्रहण में जिम्मेदारों की अनदेखी से किसान काफी नाराज है। इसको लेकर किसानों ने तहसील के अधिकारियों, नेशनल हाईवे के ठेकेदार एवं प्रोजेक्ट से जुड़े उच्च अधिकारियों पर मनमानी करने और मुआवजे में लापरवाही करने पर शिकायत भी की थी लेकिन किसानों की शिकायत को अनदेखा कर दिया गया था।




बिना मुआवजा दिए छीन ली किसान की जमीन



बर्डियाअमरा के रहने वाले किसान कैलाश पुत्र गब्बू लाल पाटीदार 23 जून 2021 को भू अर्जन शाखा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गरोठ को आवेदन दिया था। उसमें किसान ने बताया था कि उसकी बर्डियाअमरा में कृषि भूमि है। उस जमीन को राष्ट्रीय राजमार्ग में अधिग्रहण किया गया और समाचार पत्र में भी बताया गया उसने मुआवजा भी जारी हो चुका था। उसके बाद भूमि अधिग्रहण में संशोधन के चलते सर्वे एवं नक्शे में अधिग्रहण नहीं होने के कारण किसान को मुआवजा नहीं दिया गया। जब किसान ने दोबारा अपने खाते को निकाल कर जांचा तो उसमें बताया गया कि किसान की भूमि नेशनल हाईवे को बनाने के लिए अधिग्रहण हो चुकी है लेकिन किसान को उसका मुआवजा नहीं मिला था। किसान अपनी भूमि को जोड़ने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। किसान की कोई सुनने को तैयार नहीं है।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ