Soyabin kharab होने का सही कारण: समय से पहले बोवनी करने एवं फुल के समय बारिश जारी रहने से अफलन की समस्या हुई



Mandsaur जिले में किसान अफलन की स्थिति से काफी परेशान हैं। किसानों की मांग है कि soyabin फसल का सर्वे करके उचित मुआवजा व बीमा राशि दी जाए। अधिकारी भी फसल में अफलन की समस्या से नुकसान होने की बात स्वीकार कर रहे हैं। किसान शिकायत दर्ज करके खेतों का निरीक्षण और सर्वे करा सकते हैं। जल्द ही सर्वे के बाद मुआवजा वितरण किया जाएगा। किसान जिले में सर्वे करके राहत की मांग कर रहे हैं। किसान अफलन की बात कर रहे हैं लेकिन विभागीय अमला किसानों को खेती करने के तौर-तरीकों में सुधार लाने की बात कर रहा है। वही सर्वे प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत करवाने एवं वहीं से मुआवजे की बात कही जा रही है लेकिन फिलहाल के दिनों में जिले की सभी तहसीलों में किसानों की फसलों में अफलन एवं पीले मोजक रोग की बीमारी लग गई है।



विभाग और वैज्ञानिक द्वारा सर्वे के साथ-साथ प्राथमिक जांच भी की गई



कृषि विभाग ने दावा किया है कि किसानों द्वारा नुकसान होने पर राहत की मांग करने के बाद विभाग हमला और वैज्ञानिक अन्य अधिकारियों के साथ जिले के अन्य स्थानों पर फसल की स्थिति देखने पहुंचा। विभाग और वैज्ञानिकों द्वारा असल में सर्वे नहीं बल्कि फसलों की प्राथमिक जांच की गई। इसमें पता चला कि जिन किसानों ने फसल की पहले बोवनी कर दी थी उसके कारण नुकसान हुआ है और गहरी बोवनी भी इसका एक कारण है। जिन किसानों ने फसल की बाद में बोवनी की है फसलों में अफलन की स्थिति नहीं है हालांकि इनमें पीला मोजक का रोग जरूर लग गया है। जिन फसलों में अफलन की स्थिति पैदा हुई थी बारिश होने के कारण उनमें भी धीरे-धीरे फलिया आने लगी है।



कई किसान अभी भी सर्वे का इंतजार कर रहे हैं



जिले में अभी भी कई गांवों के किसान विभाग का इंतजार कर रहे हैं कि वह आएंगे और फसल का सर्वे करेंगे लेकिन विभाग ने कुछ गांवों में ही फसलों की हालत देखकर निष्कर्ष निकाल दिया है। इस बार कृषि विभाग का अमला अपने साथ कृषि वैज्ञानिकों को भी सर्वे पर ले गया था जिससे सर्वे के साथ-साथ फसलों की प्राथमिक जांच भी कर ली गई। अभी भी कई गांव के किसान अपनी फसल लेकर कलेक्टर ऑफिस और तहसीलदार पर पहुंच रहे हैं और राहत की मांग कर रहे हैं। नेपाल ने दावा किया है कि जिन किसानों को नुकसान हुआ है उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत मुआवजा दिया जाएगा।गरोठ भानपुरा क्षेत्र में किसानों ने फसल की बाद में बोवनी की थी जिसके कारण यहां पर नुकसान नहीं हुआ है लेकिन मंदसौर, मल्हारगढ़ और दलोदा क्षेत्र में किसानों ने फसल की पहले बोवनी कर दी थी जिसके कारण यहां पर नुकसान हुआ है।



विभाग में घनी बोवनी को भी बताया एक कारण



विभाग का यह भी कहना है कि प्रति एक बीघा में किसानों को जितनी सोयाबीन का उपयोग करना चाहिए किसान उससे ज्यादा बीज का उपयोग बोवनी करने में कर रहे हैं और यही कारण है कि फसलों में पीला मोजक और सूखने की स्थिति पैदा हो रही है। जिन क्षेत्रों में किसानों ने पहले बोवनी कर दी थी ऊनकी सोयाबीन में अफलन की स्थिति पैदा हो गई है और जिन किसानों ने समय पर बोवनी की है उनमें नुकसान कम हुआ है। विभाग ने दावा किया है कि जिन किसानों के नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाएगा।






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