आखिर कब होगी शिवना शुध्द: नगर पालिका कि साफ दिख रही लापरवाही, शिवना शुद्धिकरण को लेकर कोर्ट ने लिया फैसला लेकिन नगर पालिका से एक भी सदस्य नहीं आया

Shivna suddikaran abhiyan




मंदसौर की शिवना नदी को शुद्ध करने के लिए बरसों से कई योजनाएं चलती आ रही है लेकिन आज तक शिवना सुनता नहीं हो पाई है। इसमें प्रशासन और नगर पालिका की साफ-साफ लापरवाही सामने आ रही है। प्रदेश सरकार द्वारा कई बार बजट में शिवना को शुद्ध करने के लिए बड़ी रकम स्वीकृत की जाती है लेकिन नगरपालिका शिवना शुद्धिकरण के लिए कोई कदम नहीं उठाती है। कई बार सामूहिक दलों ने शिवना शुद्धिकरण के लिए अभियान भी चलाया लेकिन फिर भी नगरपालिका इसे नजरअंदाज कर रही है। नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों अपना उदासीनता का चेहरा जनता के सामने ला ही दिया है।




कोर्ट के फैसले के समय नगर पालिका का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ




2 दिन पहले भी शिवना शुद्धिकरण को लेकर मामला कोर्ट में गया था और उसके लिए कोर्ट ने फैसला भी सुनाया था लेकिन उसमें भी नगरपालिका ने अपनी लापरवाही दिखा दी कि जब कोर्ट ने फैसला लिया तब नगरपालिका का कोई भी सदस्य वहां पर उपस्थित नहीं था। इससे सीधा पता चल रहा है कि नगर पालिका शिवना को शुद्ध नहीं करना चाहती है और उसके लिए आए हुए पैसों को खा रही है। शिमला की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रहलाद राय गुप्ता और एडवोकेट सत्येंद्र सिंह जरूर उपस्थित हुए लेकिन नगरपालिका का कोई सदस्य वहां नहीं आया। निर्मल शिवना जन अभियान के सदस्यों ने भी नगरपालिका पर ताना मारते हुए कहा कि यह सिर्फ अपनी औपचारिकता निभा रहे हैं। शिवना नदी को मां कहने वाले और इसके लिए बने विभिन्न दल और बार-बार पौधारोपण की योजनाएं बनाने वाले शिवना नदी को सिर्फ कागजों में ही साफ कर रहे हैं।



देश को अब राष्ट्रपति शासन की जरूरत है




वरिष्ठ अधिवक्ता प्रहलाद राय गुप्ता ने कहा कि देश को अब राष्ट्रपति शासन की जरूरत है क्योंकि लगातार देश की व्यवस्था की बिगड़ती जा रही है और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण सामने आ ही गया है कि जब कोर्ट के न्यायाधीश ने शिवना नदी को लेकर प्रतिवेदन मांगा तो नगरपालिका ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। प्रहलाद राय गुप्ता और सत्येंद्र सोम ने इस पर नाराजगी भी जताई और यह भी कहा कि अब इस मामले को दूसरी कोर्ट में भी पेश किया जाएगा। इन्होंने नगर पालिका द्वारा प्रतिवेदन नहीं देने पर कार्यवाही की भी मांग की है।



जनता शिवना शुद्धिकरण करेगी तो जिम्मेदार क्या करेंगे



सत्येंद्र सिंह ने कहा कि अगर शिवना नदी में मिल रहा है गंदे नाले को रोकने के लिए और शिवना नदी के संरक्षण के लिए जनता कदम उठाएगी तो फिर जिम्मेदार किस लिए बनाए गए हैं। शिव नाम भक्तों द्वारा आक्रोश बताया गया है कि नगर पालिका द्वारा प्रतिवेदन क्यों नहीं दिया गया है। अगर अभी इस मामले पर कार्यवाही नहीं की गई तो भक्त मामले को न्यायाधीश के सामने पेश करेंगे। मंदसौर की शिवना एक मुख्य जल स्त्रोत है और अगर इसमें गंदे गी को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में जल संकट पैदा हो सकता है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द शिवना नदी को शुद्ध करना होगा और उसमें मिल रहे नाले को रोकना होगा। जनता को भी इसके लिए जागरूक होने की जरूरत है क्योंकि शिवना में मिल रही गंदगी चंबल को भी खराब कर रही है और ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में काफी बड़े क्षेत्र के लिए जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

2 टिप्पणियाँ