मंदसौर जिले में गांव से ज्यादा Government School है लेकिन पढ़ाई में गुणवत्ता नहीं होने के कारण 71 हजार बच्चों ने छोड़ दिए हैं Government School

 Government School condition 2021



आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि  Mandsaur जिले में जितने गांव नहीं है उससे ज्यादा Government school है लेकिन इनमें बच्चों की संख्या ना के बराबर है इसका मुख्य कारण यहां पर पढ़ाई (Teaching Level low) की गुणवत्ता नहीं है। Mandsaur जिले में Government School में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय की संख्या पहले से अधिक है और सरकार ने सभी स्कूलों को खोलने में रुचि भी दिखाई है लेकिन Government School में पढ़ाई में गुणवत्ता बेहतर नहीं होने के कारण जिले के 71000 Students ने Government स्कूलों में पढ़ाई करना छोड़ दी है और Private स्कूलों में पढ़ने की राह पकड़ ली है। यह आंकड़ा जिले में 2021 का है। आने वाले समय में यह सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।



Government School में Teachers की संख्या में भी कमी आई है




Government Schools में पढ़ाई में गुणवत्ता कम होने के साथ-साथ वहां पर शिक्षकों की संख्या में भी कमी आई है। कुछ गांव तो ऐसे हैं जहां पर एक ही शिक्षक पूरे School को संभाल लेता है। जब अधिकारियों से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेहतर व्यवस्था होने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी से ही इतिश्री कर ली। जिले में अगर कुल ग्रामों की संख्या देखी जाए तो जिले में करीब 941 गांव है और नगरीय क्षेत्र भी है। ऐसे में जिले में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की संख्या देखी जाए तो जिले में करीब 1299 प्राथमिक विद्यालय है और 544 माध्यमिक है। जिला शिक्षा अधिकारी के एल कारपेंटर का कहना है कि स्कूलों में नामांकन गत सालों की अपेक्षा कम हो गए हैं। इनको बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में 559 Private school जिले में है।



Private school's की संख्या बढ़ती जा रही है




Government Schools में पढ़ाई अच्छी नहीं होने के कारण private school's की मांग बड़ी है और जिले में तेजी से नए Private school's खुलते जा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 559  Private school है जबकि 2010 के आंकड़े देखे जाए तो उस समय जिले में 300 विद्यालय भी नहीं थे। सिर्फ कुछ सालों में ही Private school's की संख्या दोगुनी हो गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बालकों का रुझान Government school के बजाय Private school की ओर अधिक हो गया है। जबकि माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए शासन ने कई योजनाएं चला रखी है। इसके बावजूद भी पढ़ाई में गुणवत्ता नहीं होने के कारण बच्चों की संख्या प्रतिवर्ष घटती जा रही है।अगर Government School's की पढ़ाई में गुणवत्ता नहीं लाई गई तो एक समय में सरकारी स्कूल सिर्फ खंडहर बन कर रह जाएंगे।


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