यह हो क्या रहा है: गूगल पर लोगों द्वारा ढूंढी जा रही है ओलिंपिक खिलाड़ियों की जाति, आखिर जाति जानने के पीछे लोगों का क्या विचार है, हर राज्य में सर्च कर पूछी जा रही है खिलाड़ियों की जाति

 



गूगल पर वैसे तो हर चीज का कोई ना कोई उत्तर अवश्य मिल जाता है इसीलिए अगर किसी व्यक्ति को किसी भी चीज का या किसी भी प्रकार का कोई उत्तर नहीं मिल रहा हो या किसी स्थान की जानकारी प्राप्त नहीं हो रही हो तो वह सबसे पहले गूगल पर ही सर्च करता है। प्रतिदिन गूगल पर ऐसी कई प्रकार की बातें सर्च की जाती है लेकिन अभी-अभी एक अजीब घटना सामने आई है कि देश के लोग गूगल पर ओलंपिक में खेल रहे भारतीयों की जाती खोज रहे हैं। रविवार के दिन भारत को ब्रोंज मेडल दिलाने वाली बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु की जाति लोगों द्वारा गूगल पर सर्च की जा रही है। राजस्थान के लोग सबसे अधिक पीवी सिंधु की जाति सर्च कर रहे हैं। राजस्थान के अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र और बिहार के लोग भी खिलाड़ियों की जाति खोज रहे हैं।



Trends.google.com से मिली है यह जानकारी



यह जानकारी गूगल से trends.google.com से प्राप्त हुई है जिसमें बताया जा रहा है कि अभी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा खिलाड़ियों की जाति पूछी जा रही है। बैडमिंटन स्टार सिंधु ने जैसे ही ब्रोंज मेडल अपने नाम किया उसके बाद से ही लोगों द्वारा गूगल पर सिंधु की जाति सर्च किया जाने लगा। उस दिन गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला शब्द भी pv sindhu caste बन गया। सोशल मीडिया यूजर्स का आरोप है कि जब पीवी सिंधु देश के लिए कोई मेडल लाई है तो लोगों ने उनके खेल उनकी लाइफ को छोड़कर उनकी जाति को ज्यादा सर्च करना सही समझा। पीवी सिंधु की जाति पूछने वाले लोगों में सबसे ज्यादा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात के हैं।



कब से शुरू हुआ जाति ढुढने का मामला



खिलाड़ियों की जाति ढूंढने वाली यह बात कोई नई बात नहीं है बल्कि यह तब से हो रहा है जब से सिंधु पूरे देश में फेमस हुई थी। वर्ष 2016 से गूगल पर कई लोगों ने पीवी सिंधु की जाति पूछी है। वर्ष 2016 में भी उसी समय सर्च किया गया था जब सिंधु ने रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता था। उसके बाद यह सर्च कम हो गई लेकिन 1 अगस्त को दोबारा 90% सर्चिंग बढ़ गई। सिर्फ हिंदू ही नहीं अन्य खिलाड़ियों की भी जाती गूगल पर तेजी से सर्च की जा रही है। बताया जा रहा है कि ऐसा करने वाले कोई गरीब नहीं है बल्कि वह पढ़े लिखे और वह लोग हैं जिन्हें इंग्लिश का थोड़ा सा ज्ञान है। जाति का भेदभाव अभी तक चल रहा है शहरीकरण और शिक्षा भी इसे समाप्त करने में असफल ही रही है। यह कोई नई बात नहीं है बल्कि पहले से ऐसा ही होता आ रहा है।



वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा साक्षी मलिक की जाति ढुंढी गई थी



खिलाड़ियों की जाति ढूंढने का यह सिलसिला 2016 से शुरू हुआ था जब कुश्ती प्लेयर साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता था तब से लोगों ने जाति सर्च करना शुरू कर दिया था। वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा गूगल पर साक्षी मालिक की जाती ही पूछी गई थी जिसमें राजस्थान उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लोगों ने सबसे ज्यादा प्रयास किया था। उसके बाद से अभी तक यह मामला रुका नहीं है और आज भी गूगल पर कई खिलाड़ियों की जाति पूछी जा रही है। इसके अलावा लोगों ने बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने जब मेडिटेशन शासन चलाया था तब भी लोगों ने उनकी जाति सर्च की थी। पिछले 10 साल से लोग एथलीट दीपिका कुमारी की जाती सर्च कर रहे हैं।



क्रिकेटर संजू सैमसन की भी पूछी जाती है गूगल पर सबसे ज्यादा जाति




लोगों द्वारा जाति सिर्फ ओलंपिक गया एथलीट खिलाड़ियों की ही नहीं बल्कि हर प्रकार का खेल खेलने वाले खिलाड़ियों की जाति पूछी जाती है। क्रिकेट की बात की जाए तो लोगों द्वारा सबसे अधिक जाति संजू सैमसन की पूछी जाती है। गूगल की जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष 7 बार संजू सैमसन की जाति का सर्च ट्रेंड में आया था। संजू सैमसंग की जाति पूछने का मामला 2015 में शुरू हुआ था जब उन्होंने टीम इंडिया की t20 प्लेइंग 11 में अपनी जगह बना ली थी। श्रीलंका के साथ बीते महीने वनडे सीरीज हुई थी जिसमें संजू सैमसन में डेब्यू किया था उसके पश्चात भी लोगों द्वारा उनकी जाति गूगल से पूछी गई थी। यह मामला अभी तक चला ही आ रहा है।







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