किसानों के लिए खराब रहा 2021 का जमाना, प्रशासन मानने को तैयार नहीं , किसान पिछले 2 सालों के कर्ज से हो रहे हैं परेशान

 Farmar Condition 2021



पिछले 2 साल तो किसानों के लिए अतिवृष्टि और अत्यधिक वर्षा होने के कारण खराब हो गए थे। किसानों ने पिछले वर्ष भी फसल खराब होने के बाद उचित मुआवजे की मांग की थी लेकिन अभी तक 70% मुआवजा किसानों को नहीं मिला है और इस वर्ष भी किसानों की फसलें खराब हो गई है लेकिन प्रशासन मानने को तैयार नहीं है कि फसलें खराब हुई है। वर्ष की शुरुआत में तो ऐसा लग रहा था कि इस बार का जमाना किसानों के लिए अच्छा निकलेगा और बारिश के मौसम की शुरुआत भी अच्छी बारिश के साथ हुई थी लेकिन उसके बाद लंबा खेच आने के बाद फसलों को पानी नहीं मिला और फसलें छोटी ही रह गई उसके बाद जब बारिश हुई तो कई दिनों तक धूप नहीं निकली जिससे फसलों की Growth नहीं हुई और सोयाबीन में अफलन की स्थिति पैदा हो गई।



कांग्रेस नेताओं के साथ किसानों ने सौंपा ज्ञापन



सोयाबीन की फसल जिले में पूरी तरह नष्ट होने के बाद किसानों ने कांग्रेस नेताओं के साथ सोयाबीन के कुछ पौधे ले जाकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और उचित मुआवजे की मांग की है क्योंकि किसानों को पिछले वर्ष का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। कांग्रेस पार्टी भी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी इस विकट परिस्थिति में धरने और ज्ञापन के साथ सरकार को जगा रही है लेकिन फिर भी प्रशासन मानने को तैयार नहीं हो रहा है कि किसानों की फसल बर्बाद हो गई है। किसानों ने ज्ञापन राज्यपाल के नाम तहसीलदार को दिया है और कहा है कि हमें उचित मुआवजा दिया जाए क्योंकि हमने इतने महंगे बीज लाकर बुवाई की थी और पूरी फसल नष्ट हो गई है।



सोयाबीन में आया पीला मोजक का रोग




जिले में अधिकतर किसानों की सोयाबीन में पीला मोजक रोग आ गया है जिसमें कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई दवाइयां छिड़कने पर भी कोई असर नहीं दिखा और इस कारण भी सोयाबीन बर्बाद हो गई। कुछ किसानों की सोयाबीन में फलन की स्थिति पैदा हो गई है इसका मुख्य कारण पहले वर्षा नहीं होना और जब फूल आ गए तब धूप नहीं निकलना। इसी कारण जिले में सभी किसानों की सोयाबीन नष्ट हो गई।




मक्का की फसल में लग गए कीड़े, प्याज की हालत है खराब




सोयाबीन के अलावा किसानों की मक्का की फसल भी पूरी तरीके से खराब हो गई है। किसानों ने मक्का की फसल अपने खेत से निकालकर बाहर फेंक दी है। प्याज की बात की जाए तो कुछ किसानों के तो तैयार किया गया चोप हीं सूखा गया था और कुछ किसानों के प्याज लगाने के बाद उनमें जलेबी रोग आ गया और धीरे-धीरे सूखने लगे हैं। इसी प्रकार किसानों की हर फसल में इस वर्ष भी कुछ ना कुछ बीमारी आ गई है और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताई जा रही दवाई से भी असर नहीं दिख रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को मुआवजा मिलना जरूरी है वरना किसान कर्ज में डूब जाएगा। सरकार को जल्द ही सर्वे करवाकर किसानों को राहत देनी चाहिए।





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