मंदसौर: जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण जिले में बेकाबू हो गया है डेंगू, नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग लारवा खत्म करने में नहीं दिखा रहा है अपनी रुचि

 



मंदसौर में डेंगू दिन पर दिन अपने पैर पसारता जा रहा है। अगर डेंगू पर अभी से कोई कार्यवाही नहीं की गई तो आने वाले समय में यह भी कोरोना जैसा खतरनाक साबित हो सकता है। फिलहाल जिले की स्थिति देखी जाए तो जिले में डेंगू के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक जिले में कुल 118 मरीज डेंगू के सामने आ चुके हैं जबकि अभी तो डेंगू का सीजन शुरू भी नहीं हुआ है। इतना मरीज आने का कारण नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है जो अभी तक डेंगू को लेकर सतर्क नहीं हुई है और लारवा को खत्म करने में अपनी रुचि नहीं दिखा रही है।



मंदसौर शहर और सीतामऊ क्षेत्र में सबसे अधिक डेंगू के मरीज सामने आए हैं




जिले में सबसे अधिक डेंगू के मामले मंदसौर शहर और सीतामऊ क्षेत्र में आए हैं। इन क्षेत्रों से लगातार मरीज बढ़ते भी जा रहे हैं। अगर स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका शुरुआत से ही तेजी से कार्य करती तो डेंगू इतना तेजी से फैल नहीं पाता लेकिन डेंगू को खत्म करने का कार्य सिर्फ कागज में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग हकीकत में कार्य नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका की लापरवाही के कारण आम आदमी को परेशानी हो रही है।



मंदसौर शहर से 43 मरीज सामने आ चुके हैं




मंदसौर शहर की विभिन्न कॉलोनियों में से कुल 43 डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। सीतामऊ क्षेत्र से कुल 67 मरीज सामने आए हैं। यानी कि इन दोनों क्षेत्रों से ही डेंगू के मरीज अधिक आ रहे हैं। इसके बावजूद भी इन इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लारवा को खत्म करने के लिए दवाई का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। डेंगू से राजस्थान में जिले से मौत भी हुई है लेकिन विभाग इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है।



मंदसौर को एसडीपी लेने के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर होना पड़ रहा है



विभाग ने जानकारी दी कि डेंगू एक प्रकार का वायरस है जिसके लिए अभी तक ना कोई उपचार और ना कोई टीका बनाया गया है। डेंगू के मरीजों में कमी भी नहीं आ रही है। निजी अस्पताल में भर्ती डेंगू से पीड़ित 19 वर्षीय सोहेल खान की प्लेटलेट्स कम होने पर डॉक्टरों द्वारा परिजनों को तुरंत एसडीपी ब्लड की व्यवस्था करने को कहा। इस पर मंदसौर की स्तोत्रम ब्लड संस्था से सहायता मांगी लेकिन उनके पास नहीं होने पर संस्था ने झालावाड़ से संपर्क किया। झालावाड़ में भी एसडीपी ब्लड नहीं होने पर वहां के रक्त मित्रों से अपील की गई जिस पर झालावाड़ निवासी नोशिन निगार तुरंत वहां पहुंची। वहां पर लाइट बंद होने की वजह से ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया रुक गई और 6 घंटे बाद लाइट आई। हालांकि मरीज की जान बचाने के लिए महिला 6 घंटे तक वहीं बैठी रही। उसके बाद ब्लड मंदसौर पहुंचाया गया। रक्त स्तोत्रम के संस्थापक प्रद्युम्न व्यास ने विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया और कलेक्टर मनोज पुष्पों को मंदसौर में जल्द एसडीपी मशीन स्थापना करने की मांग की ताकि मंदसौर को एसडीपी ब्लड के लिए इंदौर, उदयपुर या झालावाड़ पर निर्भर नहीं रहना पड़े।



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