शाही सवारी 2021:श्रावण मास के अंतिम सोमवार को निकलेगी शाही सवारी, भव्य रथ में रजत प्रतिमा के साथ विराजेंगे राजाधिराज भगवान पशुपतिनाथ महादेव

 Sai Savari 2021 MANDSAUR


सावन मास के अंतिम सोमवार को भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी 2021 निकाली जा रही है। सावन माह के अंतिम सोमवार को नगर में शिव भक्ति चरम पर पहुंचेगी। अंतिम सोमवार को भगवान पशुपतिनाथ महादेव की शाही सवारी निकाली जाएगी। भव्य रथ में सवार रजत प्रतिमा के साथ राजाधिराज भ्रमण पर निकलेंगे। कोरोना प्रोटोकॉल के साथ सवारी निकाली जाएगी। परंपरा अनुसार चतुर्थ अंतिम सोमवार को पालनहार राजाधिराज जग प्रसिद्ध भूत भावन भगवान पशुपतिनाथ महादेव की शाही सवारी, शाही अंदाज में मंदिर प्रांगण में ही निकाली जाएगी। भगवान पशुपतिनाथ को इस वर्ष अभी नगर में भ्रमण करने का मौका नहीं मिलेगा।



मंदिर प्रांगण में ही कर सकेंगे भक्त रजत प्रतिमा के दर्शन



पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कर्म भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी मंदिर प्रांगण में निकाली गई थी और इस वर्ष भी महामारी के कारण पिछले वर्ष की तरह मंदिर प्रांगण में ही शाही सवारी निकाली जाएगी। भगवान पशुपतिनाथ के भक्त मंदिर प्रांगण में ही भगवान के दर्शन कर सकेंगे और बीमारी को जड़ से मिटाने की कामना भी करेंगे। आयोजन को लेकर शिव भक्त कई दिनों पहले से तैयारियां कर रहे हैं और शिव भक्तों में उत्साह भी झलक रहा है। शाही सवारी के लिए तैयारियां जोरों शोरों से की जा रही है। भगवान पशुपतिनाथ प्रातः काल आरती मंडल के अध्यक्ष दिलीप शर्मा ने बताया कि हर वर्ष भगवान पशुपतिनाथ महादेव नगर भ्रमण पर निकलते हैं। वर्ष में सिर्फ एक बार ही भक्त भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा के दर्शन कर पाते हैं लेकिन इस वर्ष भी भक्त प्रतिमा के दर्शन सिर्फ मंदिर प्रांगण में ही कर पाएंगे।



अभिषेक के बाद होगा श्रृंगार, फिर रथ में होगी प्रतिमा सवार


भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा का सुबह अभिषेक किया जाएगा उसके बाद पूजा अर्चना करके भव्य श्रंगार कर सुसज्जित रथ में विराजित किया जाएगा। मंदिर प्रांगण में आरती करके सवारी निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा तैयारियां जोरों शोरों से चल रही है। पूरे मंदिर परिसर और पुलिया को ओम नमः शिवाय अंकित भगवा ध्वजा से सजा दिया गया है। भव्य रथ को भी सजाया जा रहा है। उन्होंने बताया की शाही सवारी में इस वर्ष मुंबई महाराष्ट्र के ढोल ताशा पार्टी आकर्षक का केंद्र रहेगी। मंदसौर के ढोल और बैंड भी रहेंगे। शाही सवारी में बड़ी संख्या में भक्त पधारेंगे और जुलूस का आनंद उठाएंगे।

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