बच्चे ऑनलाइन गेम खेलने के लिए पैसों के साथ दे रहे हैं अपनी जान, गेम में Level up करने के लिए बच्चे ले रहे हैं कर्जा, इसमें पेरेंट्स की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, आखिर बच्चों को कैसे रोका जाए




देश में कोरोना महामारी के दौरान सरकार द्वारा लोकडाउन लगाया गया था।इस दौरान आनलाइन गेम्स का ट्रेंड इतना बढ़ गया था कि देश का हर बच्चा पढाई से ज्यादा गेम्स का आदि हो गया था। बच्चे गेम में अपनी लेवल बढ़ाने के लिए बिना सोचे समझे पैसे बर्बाद कर दिए हैं। बच्चों के पास पैसे नहीं होने पर यह दोस्तों से उदार ले रहें हैं और कुछ बच्चे अपने ही घर में चोरियां भी कर रहे हैं। उसके बाद बच्चे पैसा चुका नहीं पाते हैं और लड़ाइयां हो जाती हो। कुछ दिन पहले ही एक मामला सामने आया था जिसमें एक बच्चे ने गेम में टॉप अप करने के लिए अपने ही दोस्त से ₹5000 उधार लिए थे और कई दिनों तक वह दोस्तों को पैसे नहीं दे रहा था इसलिए दोस्त ने सिर्फ ₹5000 के लिए उसको मार डाला।



मध्यप्रदेश की एक और घटना आई है सामने



ऑनलाइन गेम में बच्चे जिस प्रकार से अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं उसमें उनसे ज्यादा उनके परिवार वालों का दोष है। इसी विषय में एक मामला सामने आया है जिसमें एक बच्चे को ऑनलाइन गेम की इतनी आदत पड़ गई कि उसने गेम खेलने के लिए अपने ₹40000 बर्बाद कर दिए। बच्चे की उम्र ज्यादा नहीं सिर्फ 13 वर्ष है। यह मध्य प्रदेश के छतरपुर मैं रहने वाला बच्चा है जिसका नाम कृष्णा पांडे यह है। जब उसकी मम्मी को पता चला कि उसने गरेना फ्री फायर में लेवल अप करने के लिए ₹40000 बर्बाद कर लिए हैं तो उसकी मम्मी ने उसको इस बात पर बहुत डांटा। मम्मी की बातों को बच्चा सहन नहीं कर पाया और वह डिप्रेशन में चला गया और कुछ दिनों में बच्चे ने सुसाइड कर ली। सिर्फ एक ऑनलाइन गेम की वजह से एक बच्चे की जिंदगी चली गई। यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमें बच्चों ने हजारों ही नहीं बल्कि लाखों रुपए ऑनलाइन गेम के लिए उड़ा दिए हैं।



आखिर बच्चे पैसे कहां से ला रहे हैं



आपके मन में विचार आ रहा होगा कि बच्चे गेम में पैसे लगाने के लिए पैसे ला कहां से रहे हैं। सबसे पहले हमें जानना होगा कि बच्चे गेम खेलने के लिए पैसे क्यों देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब कोई गेम डाउनलोड करते हैं तो वह कुछ ही सेवाएं हमें फ्री में उपलब्ध करवाता है उसके बाद अगर हमें गेम का अच्छे से एक्सपीरियंस लेना है और गेम में अच्छा साबित होने के लिए ऐप हमसे इसे अपग्रेड करने के लिए बड़ी रकम वसूलता है। जब बच्चा एप्लीकेशन वालों को रकम दे देता है तो उसके बदले में उसे अच्छे अच्छे हथियार और अच्छी-अच्छी सुविधाएं देते हैं। पैसे वसूलने वाले ऐसे बहुत सारे गेम सामने आ चुके हैं।



फ्री फायर और पब्जी पैसे वसूलने में सबसे पहले आते हैं




पैसे वसूलने के मामले में वर्तमान में जो गेम सबसे ट्रेंड में चल रहे हैं उनमें फ्री फायर और पब्जी का नाम सबसे पहले आता है। यह एक प्रकार के फाइटिंग गेम है जिसमें अगर हम हारते हैं या जीते हैं उसके बाद हमें धीरे-धीरे गेम की लत लग जाती है। उसके बाद बच्चे इनमें हथियार खरीदने के लिए पैसे बर्बाद कर देते हैं। वह आंखें बंद करके पैसे दे देते हैं। फ्री फायर और पब्जी इतने प्रसिद्ध हो चुके हैं कि प्ले स्टोर पर इनके डाउनलोड 100 करोड़ के पार पहुंच चुके हैं। जब इन एप का अपडेट आता है तो इनकी साइज 2GB तक बढ़ जाती है और उसके साथ-साथ नई स्कीम भी आती है जिसके लिए यह पैसे मांगता है।



बच्चे पैसे बैंक अकाउंट से कैसे निकाल लेते हैं



अब सबसे बड़ी बात आती है कि बच्चे एप वालों को पैसे दे देते हैं लेकिन वह अपने पेरेंट्स के बैंक अकाउंट से इनको कैसे निकाल लेते हैं। इसके बारे में जब एक्सपर्ट से पूछा गया तो एक्सपर्ट रितु माहेश्वरी जो साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड कंप्यूटिंग के एक्सपर्ट है और दूसरे मनीष खत्री जोकि टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट है इनसे जानकारी ली गई। इस दौरान दोनों एक्सपाइडर ने अलग-अलग कारण बताएं और इनसे बचने के तरीके भी बताए।



रितु माहेश्वरी का क्या कहना है



साइबर सिक्योरिटी कोर्स क्लाउड कंप्यूटिंग के एक्सपर्ट रितु माहेश्वरी का इस मामले में कहना है कि जब भी हम ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं किसी भी प्रकार का ऑनलाइन लेनदेन करते हैं तो वह हमारे क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की जानकारी अपने पास सेव कर लेता है। ऐसे में यह डाटा सेव हो जाता है और अगली बार यहां स्वयं सामने आ जाता है। इससे हमारी जानकारी की सिक्योरिटी कम हो जाती है। इससे हर प्रकार के ऑनलाइन एप पैसा वसूलने में देरी नहीं करते हैं और पैसे निकलने का खतरा बढ़ जाता है। ऑनलाइन गेम्स ऐप के साथ-साथ शॉपिंग ऐप और अन्य प्रकार के ऐप इसका फायदा उठा लेते हैं। फोन में अन्य प्रकार के सॉफ्टवेयर भी होते हैं जो हमारे डाटा को चुरा लेते हैं।



मनीष खत्री का इस मामले में क्या कहना है



मनीष खत्री का इस मामले में कहना है कि अगर आपने पहले कभी भी एक बार प्ले स्टोर से कोई ऐप पैसे देकर खरीदा है तो उस समय वह आपसे क्रेडिट और डेबिट कार्ड की डाटा ले लेता है और उसे अपने पास सेव कर लेता है। उसके बाद हम जब अगली बार कोई दूसरा ऐप डाउनलोड करते हैं या अपडेट करते हैं तो प्ले स्टोर में पेमेंट प्रोसेस को अपने आप भर देता है और पेमेंट मोड पर आ जाता है। ऐसे में अगर बच्चे को आपके पिन नंबर पता हो तो वह आसानी से पैसे ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। आपका डाटा प्ले स्टोर सेव करके रखता है और अगर बच्चे को आप के तीन पता हो तो वह आसानी से पैसे निकाल लेते हैं।



बच्चों को कैसे रोका जा सकता है



अगर पैसे इतनी आसानी से निकल जाते हैं तो हम बच्चों को कैसे रोक सकते हैं। दोनों एक्सप्रेस ने कहा कि अगर इस कार्य से बचना है तो आप को बच्चों को ऑनलाइन गेम्स से दूर रखना पड़ेगा। क्योंकि जब ऑनलाइन गेम्स का ट्रेंड नहीं चला था तो बच्चों द्वारा ट्रांजैक्शन के मामले सामने नहीं आ रहे थे लेकिन जब से ऑनलाइन गेम चले हैं उसके बाद बच्चों द्वारा किए जा रहे ट्रांजैक्शन वाले मामले सामने आ रहे हैं। अगर बच्चे को गेम्स में इंटरेस्ट है तो उसे आप ऑफलाइन गेम खेलने दे सकते हैं या गेम खेलते समय मोबाइल डाटा बंद रख सकते हैं। इससे गेम वाला आपको कोई ऑफर नहीं दिखाएगा और बच्चे गलत संगत में नहीं जाएंगे।



पेरेंट्स की भी बड़ी गलती होती है



इसमें बच्चों के पेरेंट्स की भी बड़ी गलती होती है कि वह अपने पेमेंट की लिमिट तय नहीं रखते हैं। बच्चों के पेरेंट्स को अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय कर देनी चाहिए। खासकर इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन के लिए। पेरेंट्स कोस्ट में 1000 से ज्यादा लिमिट नहीं रखनी चाहिए ताकि बच्चे किसी भी प्रकार का बड़ा ट्रांजैक्शन आसानी से नहीं कर सके। आपको जब भी जरूरत हो लिमिट अपने हिसाब से बढ़ा ले। सबसे पहली बात मैं बच्चों को मोबाइल उसी समय जब आप उसके पास बैठे हो वरना बच्चे को अकेले में मोबाइल नहीं दे। इन्हीं तरीके से बच्चों को रोका जा सकता है वरना ऐसी कई घटनाएं सामने आ सकती है।



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