मोदी सरकार 2.0 मे ही 3.0: राष्ट्रपति ने दिलाई 43 मंत्रियों को शपथ, 12 मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी, अब कुल 77 मंत्री हो गए, मोदी सरकार का बदला रूप



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की पीड़ा झेल रही जनता के दर्द और भावनाओं को समय से समझ कर उनके साथ खड़े होने का साफ संकेत दे दिया है। 3 साल बाद जनता के फैसले का इंतजार करने की बजाय खुद ही अपनी सरकार का चेहरा काफी हद तक बदल दिया है। 2 साल बाद पहली बार अपने कैबिनेट में ऐतिहासिक बदलाव किया है। बुधवार को 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्य मंत्री शामिल है। मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्रियों की संख्या अब 77 हो चुकी है। लोकसभा सदस्यों की संख्या को देखते हुए सरकार ने कुल 81 मंत्री बना दिए हैं। बुधवार को शपथ लेने वालों में से 36 ऐसे हैं जो पहले से ही मंत्री नहीं थे, जबकि 7 को राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।

नए मंत्रिमंडल की औसत उम्र 58 साल


इस बार जो मंत्रिमंडल गठित हुआ है इसे आप एक प्रकार से युवा मंत्रिमंडल कह सकते हैं क्योंकि इस बार मंत्रिमंडल की औसत आयु 58 वर्ष है। प्रधानमंत्री मोदी युवा चेहरों को तरजीह देते रहे हैं। इस बार तो उन्होंने 50 साल से कम उम्र वाले 14 मंत्री बनाए हैं। इन युवाओं में से 6 को कैबिनेट का दर्जा दिया गया है। नए शामिल किए गए अधिकांश मंत्रियों की उम्र कम ही है अब मोदी के मंत्रियों की औसत 58 साल हो गई है। पहले मंत्रियों की औसत आयु 61 वर्ष थी। 23 मंत्री तीन या अधिक बार से सांसद बन चुके। इस बार सबसे युवा मंत्री के 35 वर्ष के हैं। 11 महिला और 5 अल्पसंख्यक वर्ग से मंत्री होंगे। दो महिलाएं कैबिनेट मंत्री है सरकार ने ब्राह्मण,। भूमिहार, कायस्थ, क्षत्रिय लिंगायत पटेल मराठा और रेडी जातियों का भी संतुलन बनाया गया है।

कौन-कौन मंत्री हुए हैं बाहर


डॉक्टर हर्षवर्धन स्वास्थ्य मंत्री जो कोरोना में लोगों का दिल नहीं जीत पाए हैं। रमेश पोखरियाल शिक्षा मंत्री जो नई चुनौतियों को संभाल नहीं पाए हैं। संतोष गंगवार रोजगार मंत्री जो कोरोना मे रोजगार की चुनौती में सफल नहीं हो पाए। रविशंकर प्रसाद आईटी और कानून मंत्री जो सोशल मीडिया कंपनियों पर प्रभावी लगा में नहीं रहे। प्रकाश जावड़ेकर सूचना और प्रसारण मंत्री। सदानंद गौड़ा रसायन उर्वरक मंत्री जो कोरोनावायरस दवा उपकरण प्रबंध में विफल रहे। थावर चंद सामाजिक कार्य मंत्री नए चेहरों को जगह देने के लिए राज्यपाल की भूमिका सौंपी। बाबुल सुप्रियो भारी उद्योग संभवत बंगाल में हार के कारण कैबिनेट से बाहर हो गए।देवा श्री महिला विकास मंत्री आशा के अनुरूप कार्य नहीं कर पाई।संजय धोत्रे शिक्षा महाराष्ट्र से मंत्री थे। रतनलाल जल शक्ति मंत्रालय के कार्यों का सही निष्पादन नहीं कर पाए। प्रताप सारंगी पशुपालन उड़ीसा से मंत्री थे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ