राहत की किरण: मंदसौर में सामूहिक दुष्कर्म के 5 आरोपियों को मौत तक कैद की सजा, नाबालिग छात्रा को खेत में ले जाकर किया था दुष्कर्म




मध्य प्रदेश वह राज्य जिसमें बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं, एक और प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने अपनी गोद ली हुई बेटियों को ब्याह कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया है,

और अगर सरकार में रहते हुए उनके काम की बात करें तो उन्होंने बेटियों के लिए बहुत अच्छे अभियान चलाएं जिसमें से एक लाडली लक्ष्मी योजना है, पर प्रदेश में हो रहे हैं महिलाओं पर अत्याचार की बात करें तो इसमें अभी तक कोई खास कमी नहीं देखने को मिली है, आए दिन इसमें अलग-अलग मामले सामने आते हैं जिसमें कभी एक बेटी को उसके पिता और भाइयों द्वारा पेड़ पर लटका कर बहुत ही बेरहमी से मारा जाता है, परंतु कानूनी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दोषियों को आरोपी का नाम देकर उन्हें हिरासत में ही लिया जाता है।जबकि इस बात का पुख्ता सबूत मीडिया में भी वीडियो के रूप में उपलब्ध है।



मंदसौर में दुष्कर्म के आरोपियों को मौत तक सजा



हालांकि इनमें अब थोड़ी सी राहत की उम्मीद दिखाई दे रही है यह यह राहत की किरण मंदसौर जिले के न्यायालय से निकली है जिसमें दुष्कर्म के 5 आरोपियों को मौत तक सजा सुनाई गई है।सजा विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट जितेंद्र कुमार बाजोलियाॅ ने मंगलवार को सीतामऊ थाना क्षेत्र के गांव हांदडी की नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 5 दोषियों को मृत्यु तक कैद की सजा सुनाई है।उपसंचालक अभियोजन बापू सिंह ठाकुर द्वारा पता चला है कि छात्रा मई 2018 को घर से स्कूल कक्षा दसवीं का रिजल्ट लेने गई थी , परंतु शाम तक कुछ पता नहीं चला। उसके बाद 18 मई को छात्रा बहुत बुरी स्थिति में  शहर कोतवाली पहुंची। छात्रा द्वारा कोतवाली में उप निरीक्षक वंदना शाक्यवार को बताया गया कि ग्राम हांदडी के ही निवासी दशरथ पुत्र प्रभुलाल मोंगिया एवं फुल सिंह पुत्र शांतिलाल दोनों ने अपहरण करके लदुना निवासीकैलाश पिता जगदीश माली एवं राजू पुत्र दशरथ माली एवं राहुल पुत्र कन्हैयालाल राठौर को सौंप दिया।




तीनों दोषियों ने मिलकर खेत में ले जाकर साथ छात्रा के साथ सामूहिक रूप से बलात्कार किया।




जिसके बाद विशेष न्यायाधीश ने पास्को एक्ट के तहत तीनों अपराधियों को मृत्यु तक कैद की सजा सुनाई है, हांलकी इसमें गौर करने वाली बात यह है कि मंदसौर जिले में इस प्रकार का यह पहला मामला है।हालांकि यह हो सकता है कि अपराधी इसके लिए उच्च न्यायालय में अपील करें और उसके बाद आगे भी जा सकते हैं तो देखने वाली बात यह भी है कि आखिर छात्रा को इंसाफ मिलने में कितनी देर लगेगी, और अभी तक सजा मिलने में 3 साल लग गए हैं। लेकिन अब लोगों में राहत की किरण जगी है और आरोपियों को उम्र कैद की सजा मिली है जब तक वह मर नहीं जाते तब तक उन्हें जेल में ही रखा जाएगा।

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