जरूर देखिएगा:आज निकलेगा स्ट्राबेरी मून, जानिए इसका रहस्य,यह कब कब और किस वजह से निकलता है,इसे स्ट्राबेरी क्यो कहा गया है

 




कोई भी मून का ऐसा अजीब नाम सुनकर सोच में पड़ जाएगा कि आखिर मून का नाम भी ऐसा हो सकता है। तो हम आपको बताते हैं कि यह सच्चाई है और आज स्टोबेरी मून निकलेगा जोकि दिखने में स्टोबेरी जैसा लाल दिखाई देता है। आज हम आपको स्ट्रॉबेरी मून के बारे में सब कुछ बताने वाले हैं कि यहां कब निकलता है और इसको स्टोबेरी नाम क्यों दिया गया है और यह दिखने में कैसा होता है खबर को पूरी तरीके से पढ़े और स्ट्रॉबेरी मून के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें।



स्ट्रॉबेरी मूंग के निकलने का समय और तारीख, यह कैसे बनता है


स्ट्रॉबेरी मून कहलाने वाला यह चांद आज ही निकलने वाला है जोकि जून में पूर्णिमा या वसंत ऋतु की अंतिम पूर्णिमा को निकलने वाला चांद होता है। यह चांद तभी निकलता है जब सूर्य क्षितिज के नीचे डुबकी लगाने वाला होता है।भारत यानी अपने देश में यह मून आज दिखने वाला है। सभी लोग इसको देखने के लिए काफी उत्साहित हो रहे हैं। आपको बता दें कि यहां मैं पूरी तरीके से लाल या गुलाबी यानी कि स्टोबेरी जैसा नहीं दिखाई देगा लेकिन सूर्य की किरणों के कारण यह थोड़ा लाल दिखाई देगा। यह चांद वसंत ऋतु की आखिरी पूर्णिमा को निकलता है। सूजी जैसे ही क्षितिज में डुबकी लगा रहा होगा उसी समय क्या चांद निकलेगा और सूर्य की किरणों को उसकी सतह पर लेकर यह हमको लाल रंग का दिखाई देगा।


लगातार तीन दिनों तक रहेगी पूर्णिमा


नासा के मुताबिक इस समय लगातार 3 दिनों तक हमको पूर्णिमा दिखाई दे सकती है। भारत में यह आज पृथ्वी आधारित देशांतर में दोपहर 2:30 बजे सूर्य के विपरीत यह प्रक्रिया देखने को मिलेगी। पृथ्वी के कई स्थानों पर यह चांद आज देखने को मिल सकता है। भारत के मानक याम्योत्तर के मुताबिक यह पूर्व की ओर रेखा द्वीप समय और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा तक शुक्रवार की सुबह होगा। भारत में बुधवार की सुबह से शनिवार की सुबह तक लगातार तीन दिनों तक पूर्णिमा की तरह चांद दिखाई देगा। भारत के अलावा पृथ्वी के विभिन्न देशों में यह चांद आज ही देखने को मिलेगा।


इस मून को "हनी मून" भी कहा जाता है


इस चांद को स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ और भी कई अजीब नामों से जाना जाता है जैसे कि इसे हनीमून भी कहा जाता है । इस नाम से तो लगभग सभी लोग समझ ही जाते हैं। इस नाम की उत्पत्ति यूरोप से हुई है जहां पर जून की एक पूर्णिमा को हनीमून कहा जाता था। इस मून को हनीमून कहने का कारण यह है कि यह चांद कब निकला था जब छत्ते से शहद निकालने के लिए मीड तैयार किया गया था। स्ट्रॉबेरी कहने का एक कारण अमेरिका से भी आता है क्योंकि उत्तर पूर्वी उत्तरी अमेरिका में जब स्टोबेरी की कटाई होती है इसी समय यह मून निकला था और यह अपेक्षाकृत कम मौसम से आता है।



यूरोप के लोग इसे रोज़ मून भी कहते हैं



यह भी जान लीजिए कि नासा की दी गई जानकारी के अनुसार कुछ यूरोपीय लोगों ने पूर्णिमा के चांद को रोज मून के नाम भी दिया हुआ है। इसका यह नाम इसलिए रखा गया क्योंकि वहां के लोगों का मानना है कि यह नाम वर्ष के इस समय में पूर्णिमा के रंग के आधार पर आता है। कुछ लोगों का कहना है कि यह नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि इसी समय गुलाब के पौधों में फूल खिलते हैं।


यह मून कैसे बनता है


भारत में स्ट्रॉबेरी मून के नाम से जाना जाने वाला यह चांद आज ही निकलेगा। नासा का कहना है कि पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा लगभग उसी रास्ते में है जैसे सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा होती है। जब सूर्य ग्रीष्म सक्रांति के निकट आकाश में सबसे ऊंचाई पर दिखता है तो सूर्य के विपरीत पूर्ण चंद्रमा आमतौर पर आकाश में सबसे कम दिखाई देता है। यूरोप की बात की जाए तो वहां पर यह पूर्णिमा बाकी अन्य पूर्णिमा ओं की तुलना में अधिक वातावरण में चमकती है। आज यहां चांद स्ट्रॉबेरी जैसा दिखाई देगा क्योंकि जिस समय सूर्य क्षितिज में डुबकी लगाएगा उसी समय सूर्य के बिल्कुल विपरीत में यह चांद निकलेगा जिस पर सूर्य की किरने सीधे पड़ेगी और सूर्य की किरणें पड़ने के कारण यह चांद लाल कलर का दिखाई देगा। जरूरी नहीं है कि यह सिर्फ लाल रंग का ही निकले यह गुलाबी रंग का भी दिखाई दे सकता है।




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