इस वर्ष मंदसौर के आस पास वाले किसान सोयाबीन की जगह मूंगफली बोने में जता रहे हैं दिलचस्पी, जानिए आखिर क्या हो सकता है इसका कारण

 



प्रदेश में मानसून आने के साथ किसानों का त्योहार भी शुरू हो चुका है। प्रदेश के कुछ जिलों में खेतों में हरियाली छा गई है तो कुछ जिलों में अभी बोवनी का कार्य चल रहा है। इस वर्ष मानसून भी पिछले वर्ष के मुताबिक 5 दिन पहले आया है। सभी जिलों के किसान अपने अपने हिसाब से उपज की बोवनी कर रहे हैं। कई किसानों ने अपने खेती करने का तरीका भी बदल लिया है और कुछ किसान नई टेक्नोलॉजी के साथ खेती कर रहे हैं। प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिले की बात की जाए तो इन जिलों में किसान सोयाबीन की फसल में ज्यादा दिलचस्पी जताते हैं और इस वर्ष भी मंदसौर नीमच जिले में कई किसानों ने सोयाबीन को बोया है।


मंदसौर के पास वाले किसानों ने मूंगफली में ज्यादा दिलचस्पी जताई है


हालांकि प्रतिवर्ष मंदसौर और नीमच जिले में सोयाबीन की फसल को ज्यादा उगाया जाता है लेकिन इस वर्ष मंदसौर शहर के पास वाले गांव के किसानों ने सोयाबीन की जगह मूंगफली गाने में ज्यादा दिलचस्पी बता रहे हैं क्योंकि पिछले 2 वर्षों का आंकड़ा देखा जाए तो मंदसौर जिले में किसानों को सोयाबीन बोने के बाद नुकसान ही हुआ है। सोयाबीन उगाने में जितना खर्चा आता है उतना ऐसा भी किसानों को नसीब नहीं हुआ है। इसका कारण पिछले 2 वर्षों में इतनी बारिश हुई कि किसानों को सोयाबीन पकने के बाद उसे खेत से काटकर बाहर निकालने का भी समय नहीं मिला और सोयाबीन खेत में खड़ी खड़ी ही खराब हो गई। इसलिए इस वर्ष किसानों की मूंगफली बोने में ज्यादा दिलचस्पी जताई है ताकि अधिक वर्षा होने पर नुकसान नहीं हो।


मूंगफली में दिलचस्पी जताने पर किसानों का क्या कहना है



किसानों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस वर्ष सोयाबीन की कीमत भी काफी ज्यादा है और किसानों के पास घर का बीज उपलब्ध नहीं है ऐसे में अगर किसान बाहर से सोयाबीन लाकर उड़ा देंगे और पिछले 2 वर्षों की तरह इस वर्ष भी सोयाबीन की फसल खराब हो गई तो इस वर्ष भी कर्ज का शिकार होना पड़ेगा। इसीलिए कई किसानों ने सोयाबीन की जगह मूंगफली को चुना है और किसानों का कहना है कि मूंगफली अधिक बारिश होने के बाद भी खराब नहीं होगी और नुकसान नहीं होगा। किसानों का यह भी कहना है कि सोयाबीन के बराबर आमदनी मूंगफली भी दे देती है इसलिए मूंगफली को इस वर्ष ज्यादा किसानों ने पसंद किया है और जिन किसानों ने सोयाबीन उगाई है उन्होंने भी वर्षों से चली आ रही वैरायटी को छोड़कर नए बीज ट्राई किए हैं। जैसे किसान प्रति वर्ष 9560 और 1025 वैरायटी की सोयाबीन लगाते थे लेकिन इस वर्ष किसानों ने नए बीच को उपयोग में लिया है जो लंबे समय के बाद पकती है। मूंगफली किसान दौड़ दौड़ कर सीधे मंडी भी ले जा सकते हैं जो काफी अच्छा भाव दे देती है इसलिए मंदसौर के आसपास रहने वाले किसान मूंगफली में ज्यादा दिलचस्पी जताते हैं।

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