मंदसौर में मानसून का सुस्वागतम: जिन गांव में बारिश नहीं हुई है वहां भी उम्मीद के साथ किसानों ने की खरीफ फसल की बोवनी, कुछ गांव में अभी भी नहीं हुई है बारिश

 



मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में मानसून का आगमन हो चुका है और लोगों ने उसका स्वागत भी कर दिया है। हालांकि मानसून अभी सही तरीके से पूरे जिले में समान तरीके से नहीं फैला है जिले के कुछ ही गांव में अभी बोवनी करने लायक बारिश हुई है और कुछ गांव में नहीं हुई है। जिन गांव में बारिश हो चुकी है उन गांव में तो किसानों ने खरीफ फसल की बोवनी कर दी है और कुछ गांव में अभी भी किसान पानी का इंतजार कर रहे हैं और पानी की गुहार लगा रहे हैं। पिछले वर्ष के मुताबिक इस वर्ष मानसून थोड़ा लेट आया है और इस वर्ष ऐसा लग रहा है कि बारिश पिछले 2 वर्षों के मुताबिक कम होगी।


कुछ गांव में किसानों ने बिना बारिश के कर दी है बोवनी


जिन गांव में बारिश हो सके वहां पर तो किसानों ने खुशी-खुशी खरीफ फसल की बोवनी कर दी है लेकिन कुछ गांव के किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अब उन्हें उम्मीद है कि मानसून आ चुका है और आने वाले 3 दिनों के अंदर बारिश हो जाएगी इसलिए जहां पर बारिश नहीं हुई है वहां पर भी किसानों ने फसल बोवनी शुरू कर दी है। मंदसौर से नीमच की ओर जाते समय रास्ते में आने वाले गांव गुराडिया देदा, भुनियाखेडी, मुल्तानपुरा, रलायता, धारियां खेड़ी, साबाखेड़ा, सिन्दपन,बोतलगंज, गोबरपुरा, रेवास देवड़ा,बुगल्या,घटावदा आदि गांवों में अभी बारिश नहीं हुई है लेकिन बड़ी उम्मीदों के साथ किसानों ने फसल बोनी आज से शुरू कर दी है।


पिछले 2 वर्षों के मुताबिक इस वर्ष कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है


इस वर्ष सोयाबीन के भाव भी ऊंचाई छू रहे हैं किसानों को खरीफ फसल बोने के लिए सोयाबीन खरीदकर लानी पड़ रही है इसलिए अभी किसान रिस्क नहीं उठाना चाहते हैं। प्रदेश में मानसून तो आ चुका है लेकिन कुछ किसान बारिश होने के बाद ही फसल उगाई का काम शुरू करेंगे क्योंकि वह बीज को खरीद कर लाए हैं। इस वर्ष से बताया जा रहा है कि पिछले 2 वर्षों के मुताबिक इस वर्ष बारिश कब होगी और सोयाबीन के इतने ऊंचे दाम होने के कारण भी इस वर्ष किसानों ने सोयाबीन की फसल बोने में उत्साह जताया है। पिछले 2 वर्ष देखा जाए तो किसानों की सोयाबीन की फसल बर्बाद हो रही है क्योंकि 2 वर्षों से बारिश इतनी हो रही है कि खेत में फसल को निकालना नामुमकिन हो रहा है और फसल खेत में ही खराब हो रही है। लेकिन फिर भी इस वर्ष भी किसानों ने सोयाबीन की फसल में उत्साह जताया है।

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