बीज से तो निपटे नहीं और अब खाद की किल्लत ने बढ़ाई किसानों की परेशानी, सिर्फ आधा खाद ही पहुंचा जिले में, अभी माहवार मांग भेजी

 



खरीफ सीजन की यह सीजन में किसानों की कठिन परीक्षा ले रही है। पहले महंगी धाम का बीज तो अब खाद की पूर्ति भी मुश्किल हो रही है। सीजन शुरू होते ही किसानों को पहले तो बीज की किल्लत आ गई थी और सोयाबीन की कीमत भी काफी ज्यादा हो गई थी उससे कैसे ना कैसे किसानों ने निपट लिया लेकिन अब खाद की किल्लत सामने आ रही है। हालांकि खाद के बढ़े हुए दामों पर सरकार की सब्सिडी ने फौरी राहत दी है लेकिन मांग के अनुसार पूर्ति में विभाग के पसीने छूट रहे हैं। पहले तो बीज की तिलक में खरीफ सीजन की बुवाई से पहले किसानों को खुब परेशान किया है।


अब खाद का संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है


बारिश के बाद बुवाई की तैयारी पूरी हो चुकी है तो बुवाई के बाद जिले में खाद का संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। जिले में मांग के अनुसार अब तक सिर्फ 50% ही खाद मौजूद है। हालांकि विभाग कोरोनावायरस समय पर रेक नहीं लगने की बात कह रहा है और आगामी समय में खाद पहुंचने का दावा कर रहा है। जून से लेकर जुलाई और अगस्त में पिछले सालों की औसत के साथ मांग के अनुसार खाद्य की डिमांड विभाग ने भेज रखी है। लेकिन वर्तमान व्यवस्था को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि भगवान भरोसे ही रहना पड़ेगा। सबसे अधिक मांग डीएपी एपीके की होती है और उन्हीं की सबसे ज्यादा कमी बनी हुई है।


किसानों तक कितना खाद पहुंचा है विभाग को नहीं पता


सोसायटीयो में अब तक 8000 टन खाद पहुंच चुका है। लेकिन इसमें से किसानों को अभी तक कितना खाद बांट चुके हैं इसकी जानकारी विभाग को नहीं है। सोसाइटी तक खाद भेजकर विभाग अपने कर्तव्य को पूरा कर रहा है। विपणन संघ कार्यालय के अनुसार जिले में सभी तरह का खाद का कुल लक्ष्य 31055 टन है। इसमें से अब तक आ रहे 16234 मीट्रिक टन खाद आ चुका है। सहकारी क्षेत्र में 13329 टन खाद सोसाइटी में पहुंच चुका है। वही गोदामों में अभी 2905 टन भंडारण है। किसानों का कहना है कि अभी बोवनी चल रहा है। कई सोसायटी ओं पर खाद की कमी होने के कारण परेशान होना पड़ रहा है। बोवनी के बाद लगभग 1 सप्ताह बाद खाद की आवश्यकता होगी। उस समय की आपूर्ति के लिए किसानों ने अभी से दौड़ भाग शुरू कर दी है।


जितना चाहिए उतना नहीं है खाद, मांग भेज रखी है


जिले में लक्ष्य की तुलना में अभी 50% खाद ही आई है। अधिकारियों के अनुसार कोरोना महामारी के कारण रेक लगने में देरी हो रही है। इसके कारण अभी खाद लक्ष्य जितना नहीं पहुंच पाया है। जिले में डीएपी खाद 7700 टन की तुलना में 4032 टन आई है। अधिकारियों ने कहा है कि खाद के लिए मांग भेज रखी है। इसमें जून और जुलाई के साथ पिछले साल खाद के विक्रय स्थिति के अनुसार माहवार खाद की मांग भेजी है। आने वाले दिनों में रेक लगने के साथ खाद मिलेगा तो सोसायटी तक भेजा जाएगा।

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