किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह: परंपरागत सोयाबीन जेएस 9660 का मोह छोड़े, जानिए सोयाबीन की कौन सी वेराइटी इस वर्ष आपको अच्छा परिणाम दे सकती है



पिछले 2 सालों से लगातार मौसम के पैटर्न में बदलाव आता जा रहा है देखा भी गया है कि पिछले 2 वर्षों में बारिश का अनुमान कोई नहीं लगा पाता था और बारिश हो जाती थी मौसम विभाग भी कई बार बारिश से चकमा खा जाता था। मौसम विभाग जब भी पानी की खबर देता था उस समय पानी नहीं आता था और जिस समय खुला मौसम कि संदेश देता था उस समय बारिश हो जाती थी और इसी बदलाव का असर पिछले 2 वर्षों में सोयाबीन की फसल पर भी देखने को मिला है। पहले बारिश अगस्त से सितंबर तक समाप्त हो जाती थी लेकिन पिछले 2 वर्षों से यह सिलसिला अक्टूबर के अंत तक चलता रहता है।


वैज्ञानिकों ने दी जेएस 9660 छोड़ने की सलाह


इस साल भी बारिश का पैटर्न देखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि किसान अबकी बार परंपरागत वैरायटी की सोयाबीन जेएस 9660 को छोड़ दे और उसकी जगह किसान जेएस 2034 और जेएस 20 29, 2069 और 2098 को उपयोग कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने यह सलाह काफी सर्च करने के बाद सोच समझ कर दी है और पिछले 2 साल का आंकड़ा भी देखा गया है। इसलिए जो भी किसान प्रतिवर्ष जेएस 9560 का उपयोग करते हैं वह इस वर्ष किसी अन्य वैरायटी की सोयाबीन का उपयोग करें ताकि आप की फसल अच्छी हो सके पर सही समय पर निकल सके।


क्यों सही नहीं है इस वर्ष जेएस 9560 सोयाबीन


वैज्ञानिक कौन है जेएस 9560 सोयाबीन उगाने की सलाह इसलिए नहीं दी क्योंकि जेएस 9560 सोयाबीन 80 से 85 दिन में तैयार हो जाती है। अगर सितंबर तक बारिश का मौसम खत्म हो जाता है तो यह वैरायटी उपयोगी हो सकती है लेकिन पिछले 2 वर्षों से मौसम डगमगा रहा है और मौसम अक्टूबर के अंत तक खत्म हो रहा है। यदि किसान जून-जुलाई में यहां फसल उड़ा देते हैं तो यह 20 से 30 सितंबर के बीच पक जाती है लेकिन बारिश का मौसम 20 से 30 सितंबर के बाद आगे बढ़ जाने के कारण किसानों को अपनी सोयाबीन काटने और करने के लिए सुरक्षित समय नहीं मिल पाता है और फसल पकने के बाद उसमें बारिश होने से वह खराब हो जाती है। पिछले 2 वर्षों में देखा गया है कि सोयाबीन की फसल काफी खराब हुई है और यही कारण है कि इस वर्ष सोयाबीन की बड़ी किल्लत आ रही है। इसलिए इस वर्ष आप ऐसी सोयाबीन बीज का उपयोग करें जो थोड़े लंबे समय के बाद पकती है ताकि बारिश का मौसम खत्म होने के बाद वह सुरक्षित निकल सके।


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