फिर से आया जल संकट: चंबल लाइन में रोज दिन मिल रहे हैं नए लीकेज, काला व रामघाट में कुल मिलाकर 8 से 10 दिन का ही पानी बचा है,

 



•नगर पालिका अधिकारियों द्वारा डेम में जमा पानी को बिजली के पंप से समेटकर, कुआं में जमा किया जा रहा है।


इस साल बारिश की कमी के चलते शहर में पानी की कमी बढ़ती जा रही है, शुरुआत में ही पानी का संकट दिखने लगा था तब नगरपालिका ने हरकत में आकर चंबल परियोजना को ज्यादा जोर देकर जल्द से जल्द पूरा तो कर दिया है, परंतु अब इसमें दूसरी समस्या खड़ी हो गई है कि चंबल परियोजना में जो पाइप लाइन बिछाई गई थी उसमें रोज नए-नए लीकेज मिल रहे हैं,


काला भाटा के स्टोरेज पर भी ध्यान नहीं,

चंबल परियोजना की खुशी में अधिकारी यह ध्यान नहीं दिया कि काला भाटा बांध का पानी भी दिन पर दिन कम हो रहा है और इसी पर दूसरी समस्या आ गई की चंबल परियोजना में पाइप लाइन में दिन पर दिन लीकेज मिल रहे हैं, नतीजा शहर में पेयजल संकट बढ़ा है, अब जब नगर पालिका अधिकारियों का ध्यान इस संकट की ओर गया तो तो कलावा टावर रामगढ़ में क्रमश 6 इंच और  3.5 इंच कि पानी बचा है, ऐसे में स्थिति यह है कि नगरपालिका इससे शहर को 10 दिन पानी सप्लाई नहीं कर सकती है। ऐसे में अधिकारियों द्वारा शिवना नदी के गड्ढों में पीछे छोटे हो पाने को बिजली संचालित पंप द्वारा आगे लाने की कोशिश कर रही है जिससे शहर को पानी की सप्लाई की जा सके।


बता दे कि जिले में इस साल औसत से भी कम बारिश हुई थी।

ऐसे में शहर के पेयजल के संकट संभावना और भी बढ़ गई है, इससे निपटने के लिए नगर पालिका ने अक्टूबर-नवंबर में ही तेलिया तालाब के आस-पास कुओं का अतिक्रमण करके, रामटेकरी ,गांधीनगर, व शहर के बड़े हिस्से में इन्हीं कुओं से सप्लाई की जा रही थी । इसी समय चंबल परियोजना में भी तेजी से काम कर कर इसे पूरा किया गया।


15 दिन पहले पूरी हुई थी चंबल परियोजना


15 दिन पहले पहुंच गया था चंबल का पानी मंदसौर, लेकिन इसमें रोज नई -नई समस्याएं आ रही है, नए-नए लिखित मिलने पर अधिकारी रोज पंप बंद करके सुधार के लिए सप्लाई को रोकना पड़ रहा है। बुधवार शाम को पाइपलाइन में एक लिकेज मिला था जिस में सुधार किया जा रहा है।

इसके चलते बुधवार शाम से शहर को पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। अधिकारी केवल चंबल नदी के भरोसे रह गए जिससे उन्हें इस संकट का सामना करना पड़ रहा है। अगर पहले ही रामघाट काला भाटा पर ध्यान दिया जाता तो शायद संकट इतना बड़ा नहीं होता।


जिले में इस बार बारिश औसत से भी कम

चंबल नदी के भरोसे लेकर नगर पालिका अधिकारियों ने रामघाट लो काला भाटा ध्यान नहीं दिया, अगर पहले ही पानी को एकत्र किया जाता तो संकट से बचा जा सकता था। अब संकट बढ़ गया है कि रामघाट और कालाभाटा में पानी बहुत ही कम बचा है, जिससे मुश्किल से 7 से 8 दिन तक ही शहर को पानी की सप्लाई हो सकेगी, अगर इसमें अभी सुधार नहीं किया गया तो शहर को आगे दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।


चंबल पाइप लाइन जल्द नहीं सुधरी तो हो सकती दिक्कत

शहर की पेयजल व्यवस्था को ठीक-ठाक बनाए रखने के लिए लगभग 25 से 30% पानी सरकारी व निजी कुओ का अधिग्रहण करके रामटेकरी संपवेल में सप्लाई दी जा रही है। वहीं 70% पाने के लिए पशुपतिनाथ मंदिर के पास जमा पानी को राम घाट में डाला जा रहा है और वही आसपास और पीछे गड्ढों में जमा पानी को बिजली चालित पंप से आगे लाया जा रहा है जिससे कि शहर को पानी की सप्लाई की जा सके।


चंबल का का अटका तो हो सकती है मुसीबत

अब स्थिति है यह है कि शहर को पानी की पूर्ति कराना बेहद जरूरी हो गया है अगर चंबल पाइपलाइन 7 दिन तक से ज्यादा समय तक पानी की सप्लाई करने में  असक्षम रही तो, शहर को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है, अब  नगर पालिका के पास चंबल परियोजना पाइपलाइन को ठीक करने के लिए चार-पांच दिन से ज्यादा का समय नहीं है इसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश की जा रही है ताकि शहर को पानी की आपूर्ति की जा सके।

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