निजीकरण के खिलाफ आज 10 लाख बैंक कर्मी हड़ताल पर, मजदूर संगठन और किसानों ने भी किया निजीकरण का विरोध

 


अगर आज आप बैंक में अपना कुछ जरूरी काम निपटाने की सोच रहे थे तो ये खबर आपके लिए है। सरकारी बैंकों को प्राइवेट क्षेत्र को सौंपने के सरकार के फैसले के खिलाफ पब्लिक सेक्टर के बैंक कर्मचारी आज से 2 दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे।वहीं दूसरी और तेल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ किसान और मजदूर संगठन भी सड़कों पर उतरेंगे।किसान आज कॉर्पोरेट विरोध दिवस मनाएंगे। सरकार द्वारा देश में हर चीज का निजीकरण किया जा रहा है लेकिन चीजों का निजीकरण होने से लोगों में उदासी है। किसी को लेकर सभी 2 दिन की हड़ताल पर बैठे हैं।


निजीकरण से लोगों को नुकसान है


बैंकों की हड़ताल को लेकर बता दें कि इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि इस साल सरकार 2 सरकारी बैंकों और एक इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण होगा। सरकार के इस फैसले के खिलाफ 9 सरकारी बैंकों की यूनियन, यूनाइडेट फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने आज सोमवार और कल मंगलवार को हड़ताल का एलान किया है।इस हड़ताल की वजह से बैंकों के 10 लाख कर्मचारी 2 दिन काम पर नहीं आएंगे, जिससे बैंकों का काम प्रभावित होने की आशंका है। पिछले 4 सालों में 14 सार्वजनिक बैंकों का मर्जर किया है। अभी देश में 12 सरकारी बैंक हैं, उसके बाद इनकी संख्या घटकर 10 रह जाएगी।2 बैंकों का निजीकरण वित्तीय वर्ष 2021-22 में किया जाएगा।


जो कार्य पहले लोगों का सस्ते में हो जाता था वही पंजीकरण हो जाने के बाद उसी कार्य को करने के लिए लोगों को काफी ऊंची कीमत चुकानी पड़ेगी।  निजी करण होने के बाद संस्थानों में कभी भी छुट्टी रह सकती है। लोगों का कार्य समय पर नहीं हो पाएगा।

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