मोदी:कृषि कानून किसान के लिए विकल्प है,किसान अनुबंध किए बगैर पुराने परंपरागत तरीके से खेती करने के लिए स्वतंत्र हैं-पीएम मोदी।

 


देश में पिछले 3 महीनों से किसान दिल्ली की सीमा पर कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। जिस के संबंध में 10 फरवरी को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखी।लेकिन मोदी का सारा फोकस दिल्ली की सीमाओं पर पिछले दो ढाई महीनों से चल रहा किसान आंदोलन पर रहा है।किसान जिन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।उसके संबंध में मोदी जी का कहना है कि यह कानून किसी किसान के लिए मानना अनिवार्य नहीं है। यह कानून किसान के सामने विकल्प है। यदि कोई किसान पुराने परंपरागत तरीकों से खेती करना चाहता है तो वह स्वतंत्र है।


कांग्रेस सरकार बनने पर तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा


इसी प्रकार 10 फरवरी को ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी में एक किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि यदि देश में कांग्रेस की सरकार बन जाती है तो सबसे पहले तीनों कृषि कानूनों को हटा दिया जाएगा।तो फिर देश में कैसे आंदोलन क्यों हो रहा है यह बात किसी को समझ में नहीं आ रही है।जो लोग दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं उन्हें पीएम मोदी और प्रियंका गांधी के बयान का महत्व समझना चाहिए। यदि इन नेताओंका बयान समझ लिया जाए तो फिर देश में किसानों के आंदोलन की कोई जरूरत नहीं है। जब कानून अनिवार्य नहीं है तो फिर किसानों का अहित कैसे होगा?


आखिर देश में हो क्या रहा है 


 जब कोई किसान अडानी-अंबानी जैसे कारोबारियों से अनुबंध ही नहीं करेगा तो उसकी सफल का सौदा कैसे होगा? किसान पुराने परंपरागत तरीके से खेती करने और फिर सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)पर मंडी  में फसल बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। जो किसान स्वैच्छा से कानून के अंतर्गत अनुबंध करना चाहता है वह ही संबंधित कारोबारी की सेवाएं ले सकता है। प्रधानमंत्री की इतनी स्पष्टता के बाद देश में आंदोलन की जरुरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने विनम्रता के साथ किसानों से पूछा है कि नए क़ानूनों से किसानों का कौन सा हक छीना है, वह बताया जाए। प्रियंका गांधी ने यूपी में जो बात कही उसे भी सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए। प्रियंका वाड्रा ने बिल्कुल सही कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर क़ानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही तरीका है। चूंकि अभी केन्द्र में भाजपा की सरकार है और इस सरकार ने अपनी समझ से कानून बनाया है, लेकिन यदि यह कानून खराब और किसान विरोधी होंगे तो देश की जनता नरेन्द्र मोदी की भाजपा को हरा कर प्रियंका गांधी की कांग्रेस सरकार ले आएंगे। देश में हर पांच साल में चुनाव होते हैं। कांग्रेस की सरकार बनने पर प्रियंका वाड्रा को पूरा हक होगा कि वे मोदी के बनाए कानूनों को रद्द कर दें। प्रियंका के बयान के बाद भी सवाल उठता है कि तो फिर किसान आंदोलन की जरुरत क्या है? 

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