राज्यों के बीच फिर खड़ी हो रहीं दीवारें, अधिक कोरोना केस वाले राज्यों से संपर्क काटने लगे पड़ोसी

 



देश पहले ही पिछले 1 वर्ष से कोरोना की मार झेल रहा है और जैसे तैसे कोरोना समाप्त होने की कगार पर आ गया था तभी अचानक फरवरी माह में कोरोना ने फिर से विस्फोट कर दिया है।पिछले कुछ दिनों में एक बार फिर कोरोना प्यार का सावन में लग गया है। कोरोना के मामले में लगातार तेजी आने लग रही है। नया कोरोनावायरस सामने आया है उसे देश में संक्रमण की दूसरी लहार के तौर पर देखा जा रहा है। कोरोना के मामले फरवरी माह में अचानक से बढ़ गए हैं। कोरोना का तेजी से महिला का मामला महाराष्ट्र से शुरू हुआ है हालांकि मध्यप्रदेश में अभी तक विस्फोट देखने को नहीं मिला है।


फिर बन सकते हैं लाकडाउन जैसे हालात



 महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्य में कोरोना बहुत ही तेजी से पैर पसार रहा है। इसके कारण महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्य में कई इलाकों लॉकडाउन लगाने में हालत हो गए।जिन राज्यों में कोरोनावायरस ज्यादा आ रहे हैं उनको दूसरे राज्यों में भी अलग करना शुरू कर दिया है। पड़ोसी राज्यों में आने जाने वाले नियम और शर्तें लागू कर दि है। कुछ राज्यों ने चेक पोस्ट लगा दिया है तो कुछ निगेटिव रिपोर्ट के साथ ही लोगों को आने की अनुमति दे रहे हैं।गुजरात सरकार ने पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर चेक पोस्ट लगाकर इन राज्यों से आ रहे लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है।


सभी राज्यों ने कर ली है तैयारियां


इन दोनों राज्यों से आने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है कि कहीं उनमें कोरोना का कोई लक्षण तो नहीं है। बिना लक्षण वाले लोगों को ही राज्य में आने की अनुमति दी जाएगी। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने भोपाल, इंदौर, होशंगाबाद, बेतुल, सिवनी, छिंदवारा, बालाघाट, बरवानी, खंडवा, खरगांव, बुरहानपुर,अलीराजपुर और महाराष्ट्र की सीमा से सटे जिलों के कलेक्टरों से ड्रिस्ट्रक्ट क्राइसिस मैनेजमेंट कमिटी की बैठक बुलाने को कहा है। उधर, कर्नाटक ने पहले ही महाराष्ट्र और केरल से आने वाले लोगों के लिए निगेटिव आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट की अनिवार्यता की घोषणा कर दी थी। अब कलबुर्गी जिला प्रशासन ने महाराष्ट्र जाने वालों के लिए अडवाइजरी जारी की है। जिले में महाराष्ट्र सीमा पर पांच चेक पोस्ट लगाए गए हैं। महाराष्ट्र से कर्नाटक आ रहे लोगों को यहां निगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट दिखानी होती है। कर्नाटक ने यही नियम केरल से आने वाले लोगों के लिए भी लागू किया है।





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