अपने सभी कामकाज छोड़ सोने के सिक्के ढूंढने में लगा है गांव, गांव के सभी बड़े, बच्चे और महिलाएं कर रहे हैं पूरे दिन खुदाई का काम

 


खबर मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की है जहां पर एक पूरा गांव सोने के सिक्के की तलाश में है पार्वती नदी की खुदाई में लग गया है। पिछले 5 दिनों से पूरा गांव अपने घर का सारा कामकाज छोड़कर सभी बच्चे, और महिलाएं अलग-अलग जगह नदी को खोदकर सोने के सिक्के की तलाश में लगे हुए हैं। पूरा गांव नदी में इस तरह खुदाई कर रहा है कि जब हम उनको देखते हैं तो ऐसा लगता है कि गांव वाले सभी नदी में पानी के लिए खुदाई कर रहे होंगे जबकि गांव वाले पानी नहीं बल्कि सोने के लिए खुदाई कर रहे हैं।


यह बात सच है या अफवाह??


आपके मन में विचार आ रहा होगा कि पूरा गांव अगर खुदाई कर रहा है तो सोने के सिक्के नदी में अवश्य ही होंगे। लेकिन अभी तक यह बात स्पष्ट नहीं हुई है कि नदी में सच में सोना उपस्थित है। सिर्फ अफवाह के चलते ही पूरा गांव सोने की तलाश में नदी को खोदने लग गया है। यह बात मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की पार्वती नदी की शिवपुरा और गडूपुरा गांव की पार्वती नदी की है।जहां सिर्फ एक अफवाह के चलते ही गांव वालों ने नदी को खोदना शुरू कर दिया।


दूसरे गांव के लोग भी नदी खोदने के लिए पहुंच गए


अफवाह इतनी फैल गई कि गांव वालों को छोड़ दूसरे गांव के लोग भी नदी की खुदाई में लग गए हैं। देखते ही देखते एक के बाद एक गांव के सैकड़ों लोग नदी में खुदाई करके सोने की तलाश में पहुंच गए हैं। हालांकि अभी तक तो कोई सोने के निकलने का संकेत नहीं मिला है और ना ही अभी तक वहां पर सोने के सिक्के मिले हैं लेकिन गांव लगातार खुदाई करने में लगा हुआ है।शिवपुरा गांव सीहोर और राजगढ़ जिले की सीमा पर स्थित है। पार्वती नदी इन दोनों जिलों को काटती है।5 दिन पहले कुछ इस तरह की सूचना ग्रामीणों को लगी कि नदी में सोना चांदी के सिक्के निकल रहे हैं।


मुगल काल के सिक्के मिलने की दी गई थी सूचना


सूचना मिलते ही गांव के लोग पार्वती नदी में सोने के लिए नदी को खोदने लगे। 5 दिन से लोग नदी पर जमे हुए हैं गूगल। आपको बता दें कि पार्वती नदी के किनारे ही कुरावर के पास नाना साहब मराठा राज की समाधि है वही मुगल के लोग भी यहां से गुजरते थे।ऐसे में ग्रामीणों को सूचना मिली कि उनकी समाधि के साथ साथ सोने के सिक्के भी गाड़े गए थे।सूचना यह भी मिली थी कि नदी में से आठ से 10 सिक्के मुगलकालीन समय के मिल चुके हैं। इसी को देखकर लोग नदी की खुदाई में शुरू हो गए।



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