सुवासरा-मंदसौर की रेल लाइन की मांग को लेकर कल बंद रहेगा सुवासरा, सामाजिक, धार्मिक संगठनों की महा पंचायतों ने किया आव्हान

 


रेलवे द्वारा सुवासरा स्टेशन पर लगातार रेल सुविधाएं कम की जा रही है। कई ट्रेनों के स्टॉपेज बंद कर दिए गए हैं तो वर्ष 2013 में स्वीकृत सुवासरा सीतामऊ मंदसौर रेल लाइन का कार्य भी शुरू नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर धार्मिक, सामाजिक संगठनों एवं आपदा प्रबंधन समितियों की महापंचायत ने रेल प्रशासन के विरुद्ध चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। सबसे पहले सुवासरा को 23 जनवरी को बंद रखा जाएगा। इसके पश्चात क्रमबद्ध धरना भूख हड़ताल, चक्का जाम एवं रेल रोको आंदोलन किया जाएगा।

डीपीआर बनने के बाद भी नहीं हो रहा है कार्य शुरू

सुवासरा मंदसौर रेल लाइन की डीपीआर कब की बन चुकी है लेकिन अभी तक उसके लिए कार्य शुरू नहीं हुआ है। सुवासरा स्टेशन पर लगातार एक्सप्रेस व अन्य ट्रेनों का स्टॉपेज बंद किया जा रहा है। इसके कारण सामाजिक कार्यकर्ता बहुत आक्रोशित है और अब उन्होंने मिलकर चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी कर ली है। आपदा प्रबंध समिति संरक्षक भगवती लाल टेलर ने कहा कि मालवा-मेवाड और हाडोती को जोड़ने वाली सुवासरा मंदसौर रेल लाइन की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले ठहरने वाली ट्रेनों का स्टॉपेज हो और सुवासरा मंदसौर रेल लाइन के लिए राशि स्वीकृत की जाए।


मंदसौर सुवासरा रेल लाइन जीवन रेखा होगी साबित


पोरवाल समाज के अध्यक्ष पीरुलाल डपकरा ने कहा कि बांसवाड़ा, भीलवाड़ा,मंदसौर,नीमच को सीधे दिल्ली-मुबंई से जोड़ने वाली रेल लाइन जीवन  रेखा साबित होगी।बैठक में समाज सेवी कमल जैन, राजेश गुप्ता, भगवतीलाल मोदी, रामसिंह मेहर, अशोक शर्मा, राकेश वर्मा, अली बोहरा, राहुल जैन सहित सामान्य लोगों ने भी संबोधित किया। पुरानी बस स्टैंड पर हुई बैठक में सुवासरा के समस्त सामाजिक, धार्मिक संगठन सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में लोगों ने चरणबद्ध आंदोलन करने की तैयारी भी कर ली है। 23 जनवरी को सुवासरा पूरी तरह से बंद रहेगा। उसके बाद भूख हड़ताल और चक्का जाम किया जाएगा।


क्यों आवश्यक है मंदसौर सुवासरा रेल लाइन


मंदसौर सुवासरा रेल लाइन की मांग लगभग 40 साल पुरानी है। 1980 से ही लोगों द्वारा मांग की जा रही है सुवासरा मंदसौर रेल लाइन बिछाई जाए। वर्तमान में दोनों लाइनों पर रेल आवागमन चल रहा है। 2013 में तत्कालीन सांसद मीनाक्षी नटराजन के प्रयास से सर्वे हेतु घोषित हुई थी। 2016 में वर्तमान सुधीर गुप्ता के प्रयास से सर्वे पूर्ण हुआ। 62 किलोमीटर इस रेल लाइन के  बीच में केवल 8 स्टेशन तय किए गए। अनुमानित रुपैया 485 करोड़ों रुपए अंकलित किए गए।

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