वाशिंगटन में खालिस्तान के झंडे से महात्मा गांधी की प्रतिमा को ढका । आखिर किसान आंदोलन का यह कौन सा स्वरूप है?

Kisan andholan



देश की राजधानी नई दिल्ली में कई दिनों से किसान आंदोलन चल रहा है।नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लाखों प्रयास करने के बावजूद भी यह किसान आंदोलन थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। किसान किसी भी प्रकार के विरोध से रुको नहीं रहे हैं वह अपनी मांगे पूरी करके ही शांत बैठेंगे।
पीयूष गोयल का कहना है कि दिल्ली के बाहर किसान आंदोलन में नक्सली और माओवादी ताकते सक्रिय हो गई है।

शाहजहांपुर में भी दिख रहे हैं आंदोलन के लक्षण


किसान आंदोलन अब दिल्ली के बाहर भी चला गया है। राजस्थान के शाहजहांपुर में भी हाईवे बंद करने की कोशिश कर रहे हैं किसान।आंदोलन अब दिल्ली तक सीमित नहीं रहा यह देश के कई हिस्सों में अपना प्रभाव डाल रहा है।इसका कारण यह है कि दिल्ली के किसानों द्वारा इतने दिनों तक बिना रुके आंदोलन करने और सरकार के प्रयासों द्वारा पीछे नहीं हटना।

वाशिंगटन से आई एक आश्चर्यचकित करने वाली तस्वीर

दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन का समर्थन अब विदेशों में भी होने लग गया है। 13 दिसंबर को एक आश्चर्यचकित कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। अमेरिका में स्थित वाशिंगटन में खाली स्थान से जुड़े लोगों ने किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन किया और वहां पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर खालिस्तान का झंडा ढक दिया। किसानों को अब आंदोलन करने के लिए विदेशों से भी समर्थन आ रहे हैं।

क्या किसानों को खालिस्तान के समर्थकों का समर्थन है

आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या किसानों को वाशिंगटन के समर्थकों का समर्थन है?क्या दिल्ली के बाहर विभिन्न सीमाओं पर जो किसान बैठे हैं उनमें वाशिंगटन से जुड़े लोग भी सक्रिय हैं?
सबको पता है कि जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थे तब पंजाब में खालिस्तान की मांग ने जोर पकड़ा था, जब भारतीय सेना को सिक्खों के सर्वोच्च धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर में जबरन प्रवेश करना पड़ा जिसकी कीमत इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इसलिए शायद अभी भी किसानों को खालिस्तान वालों का समर्थन मिल रहा है लेकिन किसानों को ऐसे समर्थकों से सावधान रहना चाहिए।

कांग्रेस उठा रही है फायदा

आंदोलन में कांग्रेस भी किसानों का जमकर समर्थन कर रही है क्योंकि कांग्रेस जानती है कि किसान ही है जो हमें सत्ता दिला सकते हैं। महात्मा गांधी की प्रतिमा को झंडे से ढकने वाली घटना को किसी भी प्रकार से उचित नहीं कह सकते हैं और इस पर भारत सरकार ने अपनी नाराजगी विदेश मंत्रालय अमेरिका के समक्ष प्रकट कर दी है।

मोदी सरकार को परेशान कर रही है नक्सली ओर माओवादी सक्रिय

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि किसान आंदोलन के पीछे नक्सली और माओवादी ताकतें सक्रिय हो रही है जिनका मकसद सिर्फ मोदी सरकार को परेशान करना है और कुछ नहीं।
जब कभी वार्ता सकारात्मक दौर में होती है तो ऐसे नेता तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़ जाते हैंसभी किसान जानते हैं कि मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों मेंकोई सा भी ऐसा प्रावधान नहीं है जो किसान के विरोध में हो। किसान को जब अपने अनाज का मूल्य एमएसपी से ज्यादा मिल जाएगा तो वह अपनी फसल बेचने मंडी के जाएगा? कुछ नेता नहीं चाहते कि किसान मंडी में ना आए इसलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।किसानों को ऐसी ताकतों से दूर रहना चाहिए जो देश में अराजकता फैला रहे हैं।

किसान आंदोलन में मांगी जा रही गलत मांगे

किसानों की मांगों में सरजीत इमाम और उमर खालिद जैसे लोगों को रिहा करने की भी बात है जबकि इन लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा लगा हुआ है। पहली बात तो यह है कि किसान आंदोलन में इनको क्यों लाया जा रहा है इससे स्पष्ट पता चलता है कि किसान आंदोलन में किसानों के अलावा भी कुछ विद्रोही है।
कृषि कानूनों को संसद में दोनों सभाओं से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। लेकिन कुछ लोग इस कानून को अभी भी बंद करवाना चाहते हैं। किसानों ने राजस्थान और हरियाणा राज्य की शाहजहांपुर सीमा पर भी जाम लगा दिया है।दिल्ली को चारों ओर से बंद कर दिया गया है जिससे लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।दिल्ली में रहने वालों के लिए खाद्य सामग्री तो बाधित हो रही है लेकिन विभिन्न मार्गो से गुजरने वाले लोगों को भी काफी परेशानी आ रही है।

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